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दिल्ली-लखनऊ अग्निकांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अवैध इमारतों पर नगर निकायों को लगाई फटकार

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 जुलाई 2026

दिल्ली और लखनऊ में हाल के भीषण अग्निकांडों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि दिल्ली, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में अवैध इमारतों के खिलाफ कार्रवाई में नगर निकायों की ढिलाई अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संकरी गलियों में नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई अवैध इमारतें लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। ऐसे निर्माणों के कारण आग जैसी घटनाओं में बचाव और राहत कार्य बेहद कठिन हो जाता है।

अदालत ने विशेष रूप से 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग और 22 जून को लखनऊ में हुई आग की घटना का जिक्र किया। दिल्ली की घटना में 21 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 18 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल हादसे नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी परिणाम हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों और अन्य स्थानीय निकायों से पूछा कि आखिर अवैध निर्माण वर्षों तक कैसे खड़े हो जाते हैं। जब निर्माण शुरू होता है, उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? अदालत ने कहा कि यदि समय रहते नियमों का पालन कराया जाए तो ऐसे बड़े हादसों को रोका जा सकता है।

पीठ ने यह भी कहा कि शहरों में बिना मंजूरी के बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं, अग्नि सुरक्षा के नियमों की अनदेखी की जा रही है और कई इमारतों में न तो पर्याप्त निकास मार्ग हैं और न ही आग बुझाने की समुचित व्यवस्था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी कार्रवाई नहीं करते।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाते, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर सख्त निगरानी रखेगा और संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगेगा। अदालत का कहना है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के साथ-साथ कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश के कई बड़े शहरों में तेजी से हो रहे अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी लगातार गंभीर खतरा बनती जा रही है। अदालत की इस सख्त टिप्पणी के बाद उम्मीद की जा रही है कि नगर निकाय अवैध इमारतों के खिलाफ अभियान तेज करेंगे और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

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