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समंदर के नीचे छिड़ी महाशक्तियों की जंग: इंटरनेट की लाइफलाइन बनी अमेरिका-चीन की नई रणभूमि

अंतरराष्ट्रीय/ टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/वॉशिंगटन | 8 जुलाई 2026

दुनिया में चिप, 5G और व्यापार युद्ध के बाद अब समंदर के नीचे बिछी इंटरनेट केबलें (Undersea Cables) अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक मुकाबले का नया मोर्चा बन गई हैं। दुनिया के करीब 99% अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट और डेटा ट्रैफिक इन्हीं फाइबर-ऑप्टिक केबलों के जरिए गुजरता है, इसलिए अब इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल प्रभुत्व का सबसे अहम हथियार माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेज विस्तार ने इन केबलों का महत्व कई गुना बढ़ा दिया है। जो देश इस बुनियादी ढांचे पर अधिक नियंत्रण रखेगा, वह वैश्विक डेटा प्रवाह, डिजिटल मानकों और तकनीकी प्रभाव पर भी बढ़त हासिल कर सकता है।

इसी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका ने हाल ही में समुद्री केबल नेटवर्क पर निगरानी और लाइसेंसिंग नियम सख्त कर दिए हैं। दूसरी ओर, चीन अपनी डिजिटल सिल्क रोड परियोजना के तहत एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका में तेजी से नए अंडरसी केबल नेटवर्क बिछा रहा है। चीनी कंपनी HMN Tech अब तक 70 से अधिक देशों में एक लाख किलोमीटर से ज्यादा समुद्री केबल नेटवर्क तैयार कर चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहले यह क्षेत्र केवल व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित था, लेकिन अब राष्ट्रीय सुरक्षा, जासूसी, साइबर हमलों और भू-राजनीतिक प्रभाव का बड़ा माध्यम बन गया है। हाल के महीनों में ताइवान और बाल्टिक सागर के पास समुद्री केबलों को हुए नुकसान ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य के किसी भी सैन्य या कूटनीतिक संकट में दुश्मन की समुद्री इंटरनेट केबलों को नुकसान पहुंचाना सबसे प्रभावी रणनीति बन सकता है। इससे इंटरनेट, बैंकिंग, सैन्य संचार और वैश्विक वित्तीय नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

इसी खतरे को देखते हुए 17 देशों ने हाल ही में समुद्र के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए साझा सहयोग ढांचा (GUIDE) शुरू किया है। वहीं अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया भी समुद्र के भीतर निगरानी और सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक मानव रहित पनडुब्बी प्रणालियां विकसित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI, डेटा सेंटर, ऊर्जा आपूर्ति और अंडरसी केबल वैश्विक महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा के सबसे बड़े रणनीतिक क्षेत्र बनेंगे। अब मुकाबला सिर्फ नई केबल बिछाने का नहीं, बल्कि संकट के समय उन्हें सुरक्षित रखने, तेजी से मरम्मत करने और वैश्विक डिजिटल नेटवर्क को चालू रखने का होगा।

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