शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 जुलाई 2026
कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई NCERT पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका पर विवादित सामग्री शामिल किए जाने के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेने के कुछ घंटों बाद ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है और संबंधित पुस्तक के वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है।
NCERT ने अपने बयान में स्वीकार किया कि पुस्तक के एक अध्याय में “अनुचित पाठ्य सामग्री” और “निर्णय संबंधी त्रुटि” अनजाने में शामिल हो गई थी। परिषद ने कहा कि उसे इस गलती पर खेद है और 24 फरवरी को ही संबंधित पुस्तक के वितरण पर “अगले आदेश तक सख्त रोक” लगाने के निर्देश जारी कर दिए गए थे।
यह मामला तब तूल पकड़ गया जब कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका में “भ्रष्टाचार” से जुड़ा एक खंड शामिल होने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। शीर्ष अदालत ने प्रारंभिक टिप्पणी में इस सामग्री को “चयनात्मक संदर्भ” (Selective Reference) बताया और इस पर गंभीर आपत्ति जताई।
इसके बाद NCERT ने स्पष्ट किया कि विवादित सामग्री उसकी मंशा को प्रतिबिंबित नहीं करती और भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्कूल पाठ्यपुस्तकों की सामग्री, संपादकीय समीक्षा प्रक्रिया और शैक्षणिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली पुस्तकों में शामिल प्रत्येक तथ्य और टिप्पणी अत्यंत सावधानी से तैयार की जानी चाहिए, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की समझ और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनके दृष्टिकोण पर पड़ता है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और NCERT द्वारा संशोधित पाठ्य सामग्री पर सभी की नजरें टिकी हैं।




