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नेपाल की डिजिटल छलांग अधूरी, इंटरनेट पहुंच बढ़ी लेकिन उपयोग में पिछड़ा देश

अंतरराष्ट्रीय | नेपाल | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 3 जुलाई 2026

नेपाल ने तीन साल बाद अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के आईसीटी डेवलपमेंट इंडेक्स-2026 में वापसी तो कर ली है, लेकिन नई रिपोर्ट ने देश की डिजिटल प्रगति की एक बड़ी कमजोरी भी उजागर कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने इंटरनेट और दूरसंचार ढांचे का तेजी से विस्तार किया है, लेकिन आम नागरिक अभी भी डिजिटल सेवाओं का प्रभावी और उत्पादक उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

आईटीयू की ताजा रिपोर्ट में नेपाल को 68.1 अंक मिले हैं। वर्ष 2023 से नेपाल इस वैश्विक रैंकिंग से बाहर था क्योंकि वह समय पर आवश्यक आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं करा पाया था। इस बार नेपाल ने 10 में से कम से कम पांच जरूरी संकेतकों का डेटा जमा कर दोबारा सूची में जगह बना ली।

रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उसके वास्तविक उपयोग के बीच बढ़ता अंतर है। “मीनिंगफुल कनेक्टिविटी” श्रेणी, जिसमें नेटवर्क, मोबाइल उपकरण, इंटरनेट की कीमत, डिजिटल कौशल और साइबर सुरक्षा जैसे मानक शामिल हैं, उसमें नेपाल ने 83.7 अंक हासिल किए। वहीं “यूनिवर्सल कनेक्टिविटी” श्रेणी, जो यह मापती है कि लोग इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का वास्तविक उपयोग कितना कर रहे हैं, उसमें केवल 52.5 अंक मिले।

दोनों श्रेणियों के बीच 31.2 अंकों का अंतर इस बात का संकेत है कि नेपाल में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार तो तेजी से हुआ है, लेकिन उसका लाभ शिक्षा, कारोबार, सरकारी सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। आईटीयू ने इसे “यूसेज गैप” यानी उपयोग की खाई बताया है।

नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण (NTA) के प्रवक्ता मिन प्रसाद अर्याल ने माना कि केवल टावर और नेटवर्क बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि अब सरकार का फोकस लोगों को डिजिटल सेवाओं का गुणवत्तापूर्ण और उत्पादक उपयोग सिखाने पर होगा। इसके लिए अलग-अलग संकेतकों के आधार पर नई रणनीति और कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

नेपाल का कुल स्कोर अभी भी वैश्विक औसत 79 अंक और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के औसत 80 अंक से काफी नीचे है। दक्षिण एशिया में भूटान 86.4 अंक के साथ सबसे आगे है, जबकि श्रीलंका 78.2, बांग्लादेश 68.9 और पाकिस्तान 67.7 अंक पर हैं। इस वर्ष भारत इस सूचकांक में शामिल नहीं था।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की 48.4 प्रतिशत आबादी इंटरनेट का उपयोग करती है, जबकि 73.1 प्रतिशत लोगों के पास मोबाइल फोन है। देश के 52.5 प्रतिशत घरों तक इंटरनेट पहुंच चुकी है। लगभग 90 प्रतिशत आबादी 3जी नेटवर्क और 81.6 प्रतिशत आबादी 4जी/एलटीई सेवाओं के दायरे में है।

इसके अलावा, प्रति 100 लोगों पर 55.4 मोबाइल ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं। एक मोबाइल ब्रॉडबैंड उपभोक्ता हर महीने औसतन 17.6 जीबी डेटा, जबकि फिक्स्ड ब्रॉडबैंड उपभोक्ता 43.7 जीबी डेटा का उपयोग करता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उच्च डेटा उपयोग वाली मोबाइल सेवाओं की लागत नेपाल की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) का 2.9 प्रतिशत है, जबकि शुरुआती स्तर की फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवा की लागत 1.1 प्रतिशत है। कुछ संकेतकों का अनुमान विश्व बैंक और अन्य ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर लगाया गया क्योंकि सभी राष्ट्रीय आंकड़े उपलब्ध नहीं थे।

नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण का कहना है कि अब देश 5जी सेवा शुरू करने, डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और डेटा संग्रह प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल शिक्षा, साइबर जागरूकता और ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो केवल इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार नेपाल को डिजिटल अर्थव्यवस्था में आगे नहीं ले जा सकेगा।

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