अंतरराष्ट्रीय | नेपाल | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 3 जुलाई 2026
नेपाल में बच्चों के टीकाकरण को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जहां देश के दूरदराज़ और पहाड़ी गांवों में टीकाकरण अभियान उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रहा है, वहीं बड़े शहर और महानगर इस मामले में पीछे छूटते जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जबकि महानगरों में यह दर केवल 64 प्रतिशत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो खसरा और अन्य टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
इस साल अप्रैल में नेपाल के स्वास्थ्यकर्मियों ने ऊपरी डोल्पा स्थित दुनिया की सबसे ऊंची स्थायी मानव बस्तियों में से एक छार्का भोट तक पहुंचने के लिए चार दिनों तक कठिन पैदल यात्रा की। स्वास्थ्यकर्मी प्रतिदिन लगभग 14 घंटे बर्फीले पहाड़ों, दुर्गम घाटियों और 5,000 मीटर से अधिक ऊंचे दर्रों को पार करते हुए एचपीवी (HPV) वैक्सीन लेकर गांव पहुंचे। अभियान पूरी तरह सफल रहा और सभी पात्र बच्चियों को टीका लगाया गया। यह उदाहरण बताता है कि भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में लोगों का टीकाकरण के प्रति भरोसा मजबूत है।
इसके विपरीत, नेपाल के बड़े शहरों में हालात चिंताजनक हैं। स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में देश का कुल पूर्ण टीकाकरण कवरेज 96 प्रतिशत से घटकर 92 प्रतिशत रह गया। सबसे बड़ी गिरावट महानगरों और शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई, जहां बड़ी संख्या में बच्चे नियमित टीकाकरण की सभी खुराकें नहीं ले पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में रहने वाली फ्लोटिंग आबादी, प्रवासी मजदूर, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के निवासी, आंतरिक और बाहरी प्रवासी परिवार तथा असंगठित श्रमिक वर्ग तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है। यही कारण है कि हजारों बच्चे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से बाहर रह जाते हैं।
नेपाल सरकार बच्चों को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 14 प्रकार के टीके निःशुल्क उपलब्ध कराती है। इनमें खसरा-रूबेला, निमोनिया, तपेदिक (टीबी), डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस-बी, रोटावायरस, जापानी इंसेफेलाइटिस, टायफाइड और एचपीवी जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के टीके शामिल हैं। इसके बावजूद शहरी क्षेत्रों में पूर्ण टीकाकरण की कम दर स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक और टीकाकरण विशेषज्ञ डॉ. श्याम राज उप्रेती का कहना है कि सरकारी आंकड़े केवल आधिकारिक जनसंख्या पर आधारित हैं। वास्तविकता में टीकाकरण से वंचित बच्चों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। उनका मानना है कि सरकार को महानगरों के लिए अलग माइक्रो-प्लान तैयार कर उच्च जोखिम वाले समुदायों तक विशेष अभियान चलाना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि महानगरों में टीकाकरण कवरेज लगातार कम रहा, तो भविष्य में खसरा सहित कई संक्रामक रोगों के बड़े प्रकोप देखने को मिल सकते हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत से ही नेपाल के कई जिलों में खसरे के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें सैकड़ों बच्चे संक्रमित हुए हैं। अधिकांश संक्रमित बच्चे या तो टीकाकरण से वंचित थे या उन्होंने सभी आवश्यक खुराकें पूरी नहीं की थीं।
हालांकि नेपाल सरकार ने पिछले वर्ष पूरे देश को “पूर्ण टीकाकृत” घोषित किया था, लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों में अब भी बड़ी संख्या में बच्चे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से बाहर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह उपलब्धि खतरे में पड़ सकती है और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।



