अंतरराष्ट्रीय | जापान | ABC NATIONAL NEWS | टोक्यो | 2 जुलाई 2026
जापान में लागू किए गए नए वीज़ा नियमों ने हजारों विदेशी नागरिकों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं। देश में बढ़ती श्रमिकों की कमी और तेजी से बूढ़ी होती आबादी के बावजूद सरकार ने विदेशी कारोबारियों के लिए बिजनेस मैनेजर वीज़ा के नियम सख्त कर दिए हैं, जिससे कई प्रवासी अपना कारोबार और वर्षों की मेहनत खोने के खतरे का सामना कर रहे हैं।
नई व्यवस्था का असर खास तौर पर उन विदेशी उद्यमियों पर पड़ रहा है जिन्होंने जापान में छोटे व्यवसाय खड़े किए हैं। टोक्यो में नेपाली रेस्तरां चलाने वाली बुधाथोकी सम्झना कहती हैं, “मेरा सपना टूट गया है।” उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपना व्यवसाय खड़ा किया, लेकिन अब नए नियमों के कारण उन्हें जापान छोड़ने का डर सता रहा है।
जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने वर्ष 2025 के अंत में बिजनेस मैनेजर वीज़ा के लिए नए और अधिक कड़े नियम लागू किए। सरकार का कहना है कि इनका उद्देश्य वीज़ा प्रणाली का दुरुपयोग रोकना और वास्तविक निवेश को बढ़ावा देना है।
हालांकि, इन नियमों की आलोचना भी हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जापान पहले से ही श्रमिकों की भारी कमी से जूझ रहा है। ऐसे समय में विदेशी उद्यमियों और कामगारों के लिए नियम कठोर करना देश की अर्थव्यवस्था और छोटे व्यवसायों पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
जापान की आबादी लगातार घट रही है और बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में होटल, रेस्तरां, निर्माण, स्वास्थ्य सेवा और अन्य कई क्षेत्रों में विदेशी श्रमिकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसके बावजूद देश में आप्रवासन (इमिग्रेशन) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होती जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वीज़ा नियमों में अत्यधिक सख्ती जारी रही, तो जापान को श्रम संकट और आर्थिक विकास दोनों मोर्चों पर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, हजारों विदेशी नागरिकों के लिए यह केवल वीज़ा का मामला नहीं, बल्कि उनके रोजगार, व्यवसाय और वर्षों से संजोए गए सपनों का भी सवाल बन गया है।




