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पश्चिम बंगाल में UCC की तैयारी तेज: 29 जून को विधानसभा में पेश हो सकता है विधेयक, मंत्री दिलीप घोष का दावा

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 28 जून 2026

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। राज्य सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने दावा किया है कि यूसीसी विधेयक का विधानसभा में पारित होना तय है और सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में यूसीसी लागू हो चुकी है और अब पश्चिम बंगाल भी उसी राह पर आगे बढ़ रहा है। सरकार के अनुसार विधेयक 29 जून को विधानसभा में पेश किया जा सकता है।

मीडिया से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा कि यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह केवल समय की बात है कि विधेयक कब सदन में आएगा और कब पारित होगा। इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी संकेत दे चुके हैं कि उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू मॉडल का अध्ययन कर पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। इसके लिए सरकार ने एक अध्ययन समिति का भी गठन किया है।

इससे पहले राज्य सरकार के मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने भी घोषणा की थी कि 29 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया जाएगा। उनका कहना था कि विधानसभा में इसे पारित कराने के बाद पश्चिम बंगाल भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां समान नागरिक संहिता लागू है। विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी वादा किया था कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने पर यूसीसी लागू किया जाएगा।

वर्तमान में उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है, जहां फरवरी 2024 में यह कानून प्रभावी हुआ। इसके बाद गुजरात और असम ने भी अपने-अपने राज्यों में इससे संबंधित कानून पारित किए। मध्य प्रदेश सरकार भी आगामी विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक लाने के संकेत दे चुकी है। इसके अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में समान नागरिक संहिता के मसौदे और अध्ययन के लिए समितियां गठित की जा चुकी हैं।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लॉ) लागू हैं। यूसीसी लागू होने पर इन मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की सलाह दी गई है। हालांकि यह नीति-निर्देशक सिद्धांत है, इसलिए इसे लागू करना सरकार के विवेक पर निर्भर करता है और यह न्यायालय द्वारा बाध्यकारी नहीं है।

यूसीसी को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। समर्थकों का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित होगा, जबकि विरोध करने वाले दलों और कई सामाजिक संगठनों का तर्क है कि इस विषय पर व्यापक संवाद, विभिन्न समुदायों से परामर्श और संवैधानिक संतुलन आवश्यक है। ऐसे में यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह विधेयक पेश होता है, तो इस पर तीखी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

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