अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बगदाद | 28 जून 2026
इराक की राजधानी बगदाद एक बार फिर पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गई है। ग्रीन ज़ोन में सुरक्षा बलों की कार्रवाई, कई प्रभावशाली नेताओं की गिरफ्तारी और सेना के टैंकों की तैनाती के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रविवार को अचानक बगदाद पहुंच गए। इस दौरे की पहले से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी, जिससे इसके राजनीतिक और सामरिक महत्व को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
बगदाद पहुंचने के बाद अराघची ने सबसे पहले बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट उस स्थान पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां 3 जनवरी 2020 को अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कासिम सुलेमानी और इराकी मिलिशिया कमांडर अबू महदी अल-मुहांदिस मारे गए थे। यह स्थल ईरान समर्थक गुटों के लिए अत्यंत प्रतीकात्मक माना जाता है और अराघची की यह यात्रा स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखी जा रही है।
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से इराक में सक्रिय ईरान समर्थित शिया मिलिशिया की कड़ी आलोचना की है। बहरीन में आयोजित खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) की बैठक में भी इन सशस्त्र गुटों की निंदा की गई। अमेरिका लंबे समय से इराक सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह ईरान समर्थित मिलिशिया को निरस्त्र करे और देश में केवल सरकारी सुरक्षा संस्थाओं का नियंत्रण सुनिश्चित करे।
इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के सामने इस समय गंभीर कूटनीतिक चुनौती खड़ी है। एक ओर वे जुलाई में प्रस्तावित अमेरिका यात्रा को सफल बनाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ अपने पारंपरिक और रणनीतिक संबंधों को भी कमजोर नहीं करना चाहते। वाशिंगटन चाहता है कि इराक लगभग एक दर्जन ईरान समर्थित सशस्त्र संगठनों पर सख्त कार्रवाई करे, जबकि इन संगठनों का इराक की आंतरिक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव बना हुआ है।
हाल के घटनाक्रमों ने इराक की स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाइयों के बाद ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियां तेज हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में सैकड़ों हमले हुए हैं, अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है और कई सुरक्षा घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। इससे इराक एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक टकराव का प्रमुख मैदान बनता दिखाई दे रहा है।
अराघची की इस यात्रा का एक धार्मिक और राजनीतिक पहलू भी है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद प्रस्तावित अंतिम संस्कार और इराक में आयोजित होने वाले श्रद्धांजलि कार्यक्रमों को लेकर भी दोनों देशों के बीच विचार-विमर्श होना है। इसके साथ ही इराक में जारी अरबाईन के विशाल धार्मिक आयोजन में लाखों शिया श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा और समन्वय पर भी चर्चा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बगदाद में मौजूदा घटनाक्रम केवल इराक की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की शक्ति-संतुलन की लड़ाई का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में अराघची का यह अचानक दौरा आने वाले दिनों में ईरान, इराक और अमेरिका के बीच कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि बगदाद में चल रही राजनीतिक हलचल और क्षेत्रीय तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।




