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‘सिया और चेतन को फांसी दो’: केतन परिवार की मांग, पुणे में कैंडल मार्च के साथ न्याय की गुहार

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पुणे | 28 जून 2026

पुणे के चर्चित लोहागढ़ किले हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के बाद मृतक युवा कारोबारी केतन अग्रवाल के परिवार, मित्रों और आम लोगों में गहरा आक्रोश है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक एक ही मांग गूंज रही है—”सिया और चेतन को फांसी दो।” हालांकि भारतीय कानून के अनुसार किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपराध सिद्ध न कर दे। यदि न्यायालय इस मामले को ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ (Rarest of Rare) श्रेणी का मानता है, तभी मृत्युदंड पर विचार किया जा सकता है।

शनिवार को पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ में केतन अग्रवाल के परिजनों, मित्रों और सैकड़ों स्थानीय नागरिकों ने मौन कैंडल मार्च निकालकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और न्याय की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “Justice for Ketan Agrawal” लिखी तख्तियां थीं। पूरे मार्च के दौरान “केतन को न्याय दो” और “हत्यारों को फांसी दो” के नारे गूंजते रहे। यह केवल विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक ऐसे परिवार की पीड़ा थी जिसने अपना जवान बेटा खो दिया और अब न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।

कैंडल मार्च के दौरान केतन की मां राखी अग्रवाल भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि एक मां होने के बावजूद वह आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी के लिए मृत्युदंड चाहती हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने किसी का कोई नुकसान नहीं किया था, फिर भी उसे बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो समाज के लिए भी एक सख्त संदेश बने।

केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा कि वह अपने बेटे की शादी की तैयारियों में जुटे थे और घर में नई बहू के स्वागत के सपने देख रहे थे। लेकिन देखते ही देखते पूरा परिवार शोक में डूब गया। उन्होंने लोगों से अपील की कि न्याय मिलने तक उनका साथ दें और दोषियों को कानून के तहत सबसे कठोर सजा दिलाने में सहयोग करें।

पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी पर 18 जून को लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल की हत्या करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि सिया की नवंबर में केतन से शादी तय थी, लेकिन वह कथित रूप से चेतन चौधरी के साथ संबंध में थी और शादी नहीं करना चाहती थी। पुलिस का आरोप है कि इसी वजह से दोनों ने मिलकर कथित तौर पर हत्या की साजिश रची। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि केवल न्यायालय की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस ने सिया के माता-पिता और उसके भाई से भी विस्तृत पूछताछ की है। उसके भाई से कई घंटों तक सिया और चेतन के संबंधों तथा घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटाई गई। सिया फिलहाल पुलिस हिरासत में है और जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, घटनास्थल से जुड़े सबूत और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों की गहन जांच कर रही हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने का निर्णय लिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पीड़ित परिवार को आश्वस्त कर चुके हैं कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आज पूरे देश में आक्रोश है। लाखों लोग सोशल मीडिया पर “सिया और चेतन को फांसी दो” लिख रहे हैं और केतन का परिवार भी यही मांग कर रहा है। लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह जनभावनाओं के साथ-साथ कानून और साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। यदि अभियोजन अदालत में आरोपों को संदेह से परे सिद्ध कर देता है और न्यायालय इसे ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ मामला मानता है, तो मृत्युदंड भी संभव है। अंतिम निर्णय केवल अदालत ही करेगी।

केतन अग्रवाल अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनका परिवार हमेशा के लिए बिखर चुका है। अब पूरे देश की निगाहें अदालत पर हैं—ताकि न्याय केवल किया ही न जाए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी दे।

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