खेल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 जून 2026
भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा और टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (TTFI) के बीच विवाद अब और गहरा गया है। एशियन गेम्स 2026 की भारतीय महिला टीम में जगह नहीं मिलने के बाद मनिका बत्रा ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब की मांग की है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वे कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना सकती हैं।
मनिका बत्रा ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि यदि चयन प्रक्रिया के आधार को लेकर उन्हें स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी नहीं दी गई तो उनके पास कानूनी विकल्पों का सहारा लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री और केंद्रीय खेल मंत्री से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है।
भारतीय महिला टेबल टेनिस की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल मनिका बत्रा एशियन गेम्स के लिए घोषित पांच सदस्यीय टीम में जगह नहीं बना सकीं। फेडरेशन का कहना है कि चयन निर्धारित मानकों और पात्रता शर्तों के आधार पर किया गया है, जबकि मनिका लगातार यह दावा कर रही हैं कि उनका संघर्ष चयन के परिणाम से नहीं बल्कि चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।
मनिका ने अपने बयान में कहा कि खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि चयन किन मानकों के आधार पर किया गया। उनका कहना है कि यदि किसी खिलाड़ी को बाहर किया जाता है तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि वह किन मापदंडों पर खरा नहीं उतरा।
खेल जगत में यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मनिका बत्रा ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टेबल टेनिस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई प्रतियोगिताओं और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें देश की सबसे चर्चित टेबल टेनिस खिलाड़ियों में शामिल किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का असर केवल एक खिलाड़ी के चयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारतीय खेल महासंघों की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बहस को तेज कर सकता है।
अब सभी की नजरें टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि फेडरेशन विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है तो विवाद शांत हो सकता है, लेकिन यदि मामला आगे बढ़ता है तो यह अदालत तक पहुंच सकता है।
फिलहाल एशियन गेम्स टीम चयन को लेकर उठे इस विवाद ने भारतीय टेबल टेनिस में नया राजनीतिक और प्रशासनिक विमर्श खड़ा कर दिया है। सवाल केवल मनिका बत्रा के चयन का नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के साथ पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करने का भी है।




