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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की रक्षा ताकत पर UAE का भरोसा, ब्रह्मोस और आकाश एयर डिफेंस खरीदने की तैयारी

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/अबू धाबी | 23 जून 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत के अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार UAE भारत से दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस और उन्नत वायु रक्षा प्रणाली आकाशतीर (Akashteer) खरीदने पर गंभीर बातचीत कर रहा है। भारत और UAE के बीच यह रक्षा वार्ता ऐसे समय हो रही है जब पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हुई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच बातचीत शुरुआती चरण में है, लेकिन तेजी से आगे बढ़ रही है। UAE ने ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस नेटवर्क सहित कई भारतीय रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखाई है। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है और इसे दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल क्रूज़ मिसाइलों में गिना जाता है। यह जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है।

आकाशतीर प्रणाली भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक एयर डिफेंस कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क है, जो दुश्मन के हवाई हमलों की पहचान, ट्रैकिंग और जवाबी कार्रवाई को पूरी तरह स्वचालित बनाता है। पश्चिम एशिया में ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए UAE इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा मान रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और UAE के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रक्षा सहयोग के बाद अब दोनों देश सैन्य तकनीक के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। यह संभावित रक्षा समझौता भारत की बढ़ती वैश्विक रक्षा निर्यात क्षमता का भी बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

भारत के रक्षा निर्यात में पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रक्षा निर्यात 4 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा बेहद सीमित था। ब्रह्मोस को लेकर फिलीपींस के बाद वियतनाम, इंडोनेशिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अब UAE जैसे देशों की रुचि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में नई पहचान दिला रही है।

पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत और UAE के बीच यह संभावित रक्षा सौदा केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत माना जा रहा है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो यह भारत के रक्षा निर्यात इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक साबित हो सकता है।

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