स्पोर्ट्स डेस्क | ABC NATIONAL NEWS | 23 जून 2026
17वें गोल के साथ क्लोज़े का रिकॉर्ड टूटा, फुटबॉल के शिखर पर पहुंचे अर्जेंटीना के जादूगर
फुटबॉल की दुनिया में कुछ रिकॉर्ड टूटते हैं, कुछ रिकॉर्ड बनते हैं और कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जो इतिहास बन जाते हैं। सोमवार की रात अमेरिका के डलास स्टेडियम में कुछ ऐसा ही हुआ, जब अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने ऑस्ट्रिया के खिलाफ गोल दागकर फीफा विश्व कप इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल कर लिया।
मैच शुरू होने से पहले मेसी और जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोज़े 16-16 गोल के साथ बराबरी पर थे। पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि क्या 37 वर्षीय मेसी एक और इतिहास रच पाएंगे। लेकिन कहानी इतनी आसान नहीं थी।
मैच के शुरुआती मिनटों में अर्जेंटीना को पेनल्टी मिली। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शक अपनी सीटों से उठ खड़े हुए। सबको लगा कि इतिहास बस कुछ सेकंड दूर है। मेसी आगे बढ़े, रन-अप लिया और शॉट मारा… लेकिन गेंद पोस्ट के बाहर निकल गई। पूरा स्टेडियम कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध रह गया। ऐसा लगा मानो रिकॉर्ड को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।
लेकिन महान खिलाड़ी वही होता है जो असफलता को कहानी का अंत नहीं बनने देता।
39वें मिनट में अर्जेंटीना ने शानदार आक्रमण किया। क्रिस्टियन मेडिना ने गेंद आगे बढ़ाई, थियागो अल्माडा ने चतुराई से उसे छोड़ दिया और तभी मेसी बिजली की गति से बॉक्स में पहुंचे। बाएं पैर से लगाया गया उनका सटीक शॉट ऑस्ट्रिया के गोलकीपर अलेक्जेंडर श्लेगर को चकमा देता हुआ जाल में समा गया।
गेंद जैसे ही नेट में पहुंची, पूरा स्टेडियम गूंज उठा। मेसी ने दोनों हाथ आसमान की ओर उठाए और फुटबॉल इतिहास का एक नया अध्याय लिख दिया। यह उनके विश्व कप करियर का 17वां गोल था और इसके साथ ही मिरोस्लाव क्लोज़े का रिकॉर्ड इतिहास बन गया।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ अपने 200वें अंतरराष्ट्रीय मैच में विश्व कप का पहला हैट्रिक लगाया था। उस मैच में किए गए तीन गोलों ने उन्हें क्लोज़े की बराबरी पर पहुंचा दिया था। अब ऑस्ट्रिया के खिलाफ उन्होंने रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
और यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले मेसी हैमस्ट्रिंग की हल्की चोट से जूझ रहे थे। आलोचकों का मानना था कि उम्र और फिटनेस उनके प्रदर्शन पर असर डाल सकती है। लेकिन मैदान पर उतरते ही उन्होंने साबित कर दिया कि क्लास कभी बूढ़ी नहीं होती।
हालांकि मेसी का यह रिकॉर्ड हमेशा के लिए सुरक्षित रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। फ्रांस के सुपरस्टार किलियन एम्बाप्पे 14 विश्व कप गोल के साथ तेजी से उनके करीब पहुंच रहे हैं। सिर्फ 27 वर्ष की उम्र में एम्बाप्पे के पास 2030 और 2034 विश्व कप खेलने का भी मौका होगा। इसलिए फुटबॉल जगत में अब एक नई बहस शुरू हो गई है—क्या एम्बाप्पे कभी मेसी का यह रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे?
लेकिन फिलहाल दुनिया सिर्फ एक नाम का जश्न मना रही है—लियोनेल मेसी।
वह खिलाड़ी जिसने लगभग हर बड़ा खिताब जीता, हर बड़ा रिकॉर्ड छुआ और अब विश्व कप के सबसे बड़े गोलस्कोरर के रूप में अपना नाम हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया।
कहते हैं रिकॉर्ड बनते ही टूटने के लिए हैं, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं जो सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि एक युग की पहचान बन जाते हैं। मेसी का 17वां विश्व कप गोल भी ऐसा ही एक रिकॉर्ड है।
और शायद इसी वजह से फुटबॉल की दुनिया आज एक बार फिर कह रही है—”मेसी सिर्फ खिलाड़ी नहीं, एक दौर का नाम है।”




