राष्ट्रीय/कर्नाटक | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 20 जून 2026
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कानूनी स्थिति, पंजीकरण और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर तीखे सवाल उठाए हैं। इस बार उन्होंने बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनागी की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि दलितों को RSS पर सवाल नहीं उठाने चाहिए।
प्रियंक खड़गे ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा कि आखिर दलित RSS से सवाल क्यों नहीं पूछ सकते। उन्होंने कहा कि क्या दलित समाज का हिस्सा नहीं हैं? क्या दलित संविधान का हिस्सा नहीं हैं? किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह तय करे कि कौन किससे सवाल पूछ सकता है और कौन नहीं।
खड़गे ने कहा, “बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनागी कहते हैं कि दलितों को RSS पर सवाल नहीं उठाने चाहिए। क्यों? क्या दलित समाज का हिस्सा नहीं हैं? क्या दलित संविधान का हिस्सा नहीं हैं? मुझे कौन बताएगा कि मैं क्या पूछूं और क्या नहीं पूछूं? एक नागरिक के रूप में मेरे अधिकार हैं और कर्नाटक के गृह मंत्री के रूप में मेरी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी संस्था, संगठन या समूह से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय किसी भी संगठन को जवाबदेही से ऊपर नहीं माना जा सकता।
RSS की कानूनी स्थिति को लेकर अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए खड़गे ने कहा कि यदि कोई संगठन राज्य में इतने बड़े स्तर पर सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक या अन्य गतिविधियां चला रहा है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह किस कानूनी ढांचे के तहत काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, “यदि आप मेरे राज्य में इतना बड़ा संगठन चला रहे हैं, तो आपको पंजीकरण कराना होगा या कम से कम यह बताना होगा कि आप किस कानून के तहत यह सारी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।”
खड़गे ने संघ की वित्तीय पारदर्शिता और धन के स्रोतों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि संगठन दान और जनसहयोग से संचालित होता है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि धन कहां से आता है और उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है।
पिछले कुछ दिनों से प्रियंक खड़गे लगातार RSS की संगठनात्मक और कानूनी संरचना को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर भी संगठन के पंजीकरण, वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को लेकर जानकारी मांगी थी। उनके इन सवालों को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहराया हुआ है।
बीजेपी और संघ से जुड़े नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस RSS को राजनीतिक निशाना बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े वैध प्रश्न उठा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि RSS को लेकर छिड़ी यह बहस अब केवल वैचारिक टकराव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह संगठन की कानूनी पहचान, वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंच चुकी है।
फिलहाल प्रियंक खड़गे के नए बयान ने इस विवाद को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में बीजेपी और RSS की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।




