राष्ट्रीय/महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 20 जून 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे ‘ऑपरेशन टाइगर’ और शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित बगावत के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भावुक अंदाज में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस समारोह में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं और शिवसैनिकों का उन पर भरोसा नहीं है तो वे पद छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन संघर्ष के मैदान से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मुंबई के शन्मुखानंद हॉल में आयोजित कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने कहा, “मैं चुनौतियों से भागने वाला व्यक्ति नहीं हूं। लेकिन अगर आपको मुझ पर भरोसा नहीं है तो मैं पद छोड़ने को तैयार हूं।” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और छह सांसदों की संभावित बगावत के संदर्भ में देखा जा रहा है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से चर्चा है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं उनमें संजय दिना पाटिल, नागेश पाटिल-अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख और संजय जाधव शामिल हैं। खास बात यह रही कि ये सभी सांसद स्थापना दिवस समारोह में अनुपस्थित रहे, जिससे अटकलों को और बल मिला।
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने बगावत के मुद्दे पर जनता से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जिन सांसदों को लोगों ने उनके आग्रह और बालासाहेब ठाकरे के नाम पर वोट दिया था, यदि वही सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं तो इसके लिए वे मतदाताओं से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने कहा कि “मैं उन मतदाताओं से माफी मांगता हूं जिन्होंने हमारे सांसदों को चुना और अब वे पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लोगों ने हमें बालासाहेब ठाकरे के नाम और हमारे आह्वान पर वोट दिया था। हमने मोदी के नाम का सहारा लेकर चुनाव नहीं जीता था।”
इस अवसर पर उद्धव ठाकरे ने उन सांसदों का सार्वजनिक सम्मान भी किया जो तमाम राजनीतिक दबावों के बावजूद पार्टी के साथ खड़े रहे। इसे पार्टी के वफादार नेताओं को संदेश देने और संगठन में मनोबल बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
अपने भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा व्यवस्थित तरीके से शिवसेना को खत्म करने की कोशिश कर रही है और देश को “वन पार्टी, नो इलेक्शन” मॉडल की ओर धकेला जा रहा है। ठाकरे ने कहा कि लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है और विपक्षी दलों को समाप्त करने की राजनीति की जा रही है।
उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ अपने संबंधों को लेकर भी दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अविभाजित शिवसेना ने दशकों तक कांग्रेस के खिलाफ संघर्ष किया, लेकिन कांग्रेस ने कभी शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की। उनके अनुसार भाजपा और कांग्रेस के रवैये में यही सबसे बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा, “हमने आधी जिंदगी कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई में बिताई, लेकिन कांग्रेस ने कभी शिवसेना को समाप्त करने का प्रयास नहीं किया। आज भाजपा यही करने में लगी है।”
हालांकि कांग्रेस के साथ संभावित विलय की अटकलों को उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया। उद्धव ने स्पष्ट कहा कि शिवसेना मराठी मानुष की अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए बनी है और किसी भी राजनीतिक दल में उसके विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि शिवसेना अपनी अलग पहचान और विचारधारा के साथ आगे बढ़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे का यह भाषण केवल भावनात्मक अपील नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर असंतोष को नियंत्रित करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश भी थी। 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद अब यदि सांसदों का एक बड़ा समूह भी पार्टी छोड़ता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका होगा।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सभी की निगाहें उन छह सांसदों के अगले कदम पर टिकी हैं। लेकिन स्थापना दिवस के मंच से उद्धव ठाकरे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चाहे राजनीतिक चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, वे पार्टी की पहचान और अस्तित्व की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए तैयार हैं।




