राष्ट्रीय/महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 20 जून 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना परिवार के भीतर बड़े राजनीतिक विस्फोट के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के नाम से चर्चा में आए घटनाक्रम के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसदों के संभावित विद्रोह ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे विवाद पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है और उन्हें “बेशर्म, एहसानफरामोश और भ्रष्ट” करार दिया है।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि जिन नेताओं को जनता ने उद्धव ठाकरे और शिवसेना के नाम पर वोट देकर संसद भेजा, वही आज व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों को पार्टी ने पहचान, पद और राजनीतिक भविष्य दिया, वही लोग अब सत्ता के लालच में संगठन के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। आदित्य ने कहा कि ऐसे नेताओं को महाराष्ट्र की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद—संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमराजे निंबालकर—जल्द ही महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो 2022 में हुए बड़े विभाजन के बाद यह उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा सबसे बड़ा राजनीतिक झटका होगा।
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने भी पूरे घटनाक्रम को लेकर बड़ा दावा किया है। राउत के अनुसार बागी सांसदों के बीच इस बात को लेकर विवाद चल रहा है कि केंद्र सरकार में मंत्री पद किसे मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विचारधारा और जनादेश की बात करने वाले नेता आज केवल सत्ता और पद के लिए पार्टी बदलने को तैयार हैं। राउत ने कहा कि यह राजनीतिक सिद्धांतों की नहीं, बल्कि राजनीतिक सौदेबाजी की कहानी है।
उधर बागी खेमे से जुड़े कुछ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए वे नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने आधिकारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन घटनाक्रम जिस दिशा में बढ़ रहा है, उससे उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि छह सांसद वास्तव में शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं तो इसका प्रभाव केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। इससे शिवसेना (यूबीटी) के संगठनात्मक ढांचे और आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भी गहरा असर पड़ सकता है। पहले ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी का बड़ा हिस्सा अलग हो चुका है और अब लोकसभा सांसदों की संभावित बगावत उद्धव ठाकरे के राजनीतिक प्रभाव को और कमजोर कर सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा और महायुति की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि महाराष्ट्र में विपक्ष को कमजोर करने के लिए लगातार राजनीतिक अभियानों को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं महायुति के नेता इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे नेताओं का स्वैच्छिक राजनीतिक निर्णय बता रहे हैं।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सभी की नजरें इन छह सांसदों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका साबित होगा। लेकिन यदि पार्टी नेतृत्व बगावत रोकने में सफल रहता है तो यह उनके लिए संगठन को पुनर्गठित करने का अवसर भी बन सकता है।
एक बात तय है कि महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। ‘बाला साहेब की सेना’ के उत्तराधिकार की लड़ाई अब भी जारी है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष और अधिक तीखा होने वाला है।




