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युद्धविराम के बावजूद लेबनान में तबाही: इज़रायली हमलों में 47 की मौत, अमेरिका-ईरान वार्ता टली

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेरूत/वॉशिंगटन | 20 जून 2026

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम की घोषणा के बावजूद शुक्रवार को लेबनान में हुए इज़रायली हवाई हमलों और गोलाबारी में कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई, जबकि 97 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते को क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा था।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों पर रातभर इज़रायली हमले जारी रहे। अनेक गांवों और कस्बों में भारी तबाही हुई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि लगातार बमबारी के कारण राहत और बचाव दल कई स्थानों तक पहुंच ही नहीं पाए। वहीं इज़रायल ने दावा किया है कि उसने हिज़्बुल्लाह के 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया और संगठन के दर्जनों लड़ाकों को मार गिराया है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अगला दौर की वार्ता भी रद्द कर दी गई। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिया कि जब तक लेबनान में संघर्ष नहीं रुकता, तब तक आगे की बातचीत संभव नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी अपनी स्विट्जरलैंड यात्रा स्थगित कर दी है।

हालांकि देर शाम अमेरिकी और क़तरी मध्यस्थों की कोशिशों के बाद इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की घोषणा की गई। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह समझौता ईरान की सहमति और क्षेत्रीय मध्यस्थों के सहयोग से संभव हो सका। लेकिन युद्धविराम लागू होने से कुछ घंटे पहले तक दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी और हवाई हमले जारी रहे, जिससे समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इज़रायली सेना दक्षिणी लेबनान में “जब तक आवश्यक होगा” तब तक मौजूद रहेगी। उन्होंने हिज़्बुल्लाह को चेतावनी देते हुए कहा कि इज़रायल अपने सैनिकों और नागरिकों पर किसी भी हमले की भारी कीमत वसूलेगा। दूसरी ओर हिज़्बुल्लाह नेताओं का कहना है कि यदि इज़रायली हमले जारी रहे तो संगठन जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है।

इस बीच ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते का पालन तभी संभव होगा जब उसकी “रेड लाइन” का सम्मान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौते के उल्लंघन या अत्यधिक दबाव की स्थिति में ईरान निर्णायक जवाब देगा।

क्षेत्रीय कूटनीति भी तेजी से सक्रिय हो गई है। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने संयुक्त रूप से अमेरिका और ईरान के बीच संवाद प्रक्रिया का समर्थन किया है और शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई बातचीत में भी इसी मुद्दे पर सहमति बनी।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते की सफलता अब काफी हद तक इज़रायल-हिज़्बुल्लाह मोर्चे पर निर्भर करेगी। यदि लेबनान में संघर्ष जारी रहता है तो पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। दूसरी ओर यदि युद्धविराम टिकता है तो यह पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने और व्यापारिक मार्गों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। युद्धविराम लागू हो चुका है, लेकिन दोनों पक्षों के बयानों और जमीनी हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि यह शांति कितने समय तक टिक पाएगी। पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक छोटी चूक पूरे क्षेत्र को नए संघर्ष की आग में झोंक सकती है।

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