राष्ट्रीय/मध्य प्रदेश | ABC NATIONAL NEWS | भोपाल | 18 जून 2026
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा। 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में यह विधेयक सरकार की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
बुधवार को विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार कई समकालीन और महत्वपूर्ण विषयों पर काम कर रही है और समान नागरिक संहिता उनमें सबसे प्रमुख है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है और जल्द ही इसका प्रारूप विधानसभा के सामने रखा जाएगा।
UCC लागू करने की तैयारी के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2026 में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। यह समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों और सामाजिक समूहों से सुझाव लेने के लिए व्यापक स्तर पर संवाद कर रही है। समिति कानूनी विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसी रिपोर्ट के आधार पर विधेयक का अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है। वर्तमान में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। UCC के समर्थकों का मानना है कि इससे संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी और महिलाओं सहित सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड के बाद यह दूसरा बड़ा राज्य हो सकता है जो अपने स्तर पर UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीजेपी लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने वैचारिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती रही है। पार्टी का तर्क है कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में भी समान नागरिक संहिता का उल्लेख है और इसे लागू करना सामाजिक न्याय तथा राष्ट्रीय एकता की दिशा में आवश्यक कदम है।
हालांकि इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि देश और समाज की विविधता को देखते हुए इस तरह के कानून पर व्यापक सहमति बनाना जरूरी है। कई सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि किसी भी बदलाव से पहले सभी समुदायों की आशंकाओं और सुझावों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार UCC का मुद्दा केवल कानूनी या सामाजिक विषय नहीं है, बल्कि आने वाले समय में यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है। विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद इस पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष सरकार से इसके मसौदे और प्रावधानों पर स्पष्टीकरण मांग सकता है, जबकि सरकार इसे अपने सुधारवादी एजेंडे के रूप में प्रस्तुत करेगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संकेत दिया है कि सरकार इस कानून को जल्दबाजी में लागू नहीं करना चाहती, बल्कि सभी पक्षों से चर्चा और सुझाव लेने के बाद ही अंतिम स्वरूप देगी। उनका कहना है कि राज्य सरकार संविधान की भावना और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही है।
फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति में UCC सबसे चर्चित विषय बन चुका है। जुलाई में शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में यह विधेयक पेश होते ही राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रस्तावित विधेयक में कौन-कौन से प्रावधान शामिल किए जाते हैं और इसे लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
यदि यह विधेयक पारित होता है तो मध्य प्रदेश देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की अग्रिम पंक्ति में शामिल हो जाएगा और राष्ट्रीय स्तर पर भी इस विषय पर चल रही बहस को नई दिशा मिल सकती है।



