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शिवसेना (UBT) में दूसरी बगावत की आशंका! लोकसभा स्पीकर के पास पहुंची ठाकरे सेना, कानूनी लड़ाई की तैयारी

राजनीति/ महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई/नई दिल्ली | 17 जून 2026

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संकट गहराता दिखाई दे रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कई सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व ने सक्रिय कदम उठाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की है। उद्धव ठाकरे गुट को आशंका है कि पार्टी में दूसरी बड़ी बगावत हो सकती है, जिसके चलते उसने स्पीकर को पहले ही एक “कैविएट लेटर” भेजकर अपना पक्ष रखने का अधिकार सुरक्षित करने की कोशिश की है।

शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ सांसद अनिल देसाई ने बताया कि पार्टी ने मंगलवार रात लोकसभा अध्यक्ष को ईमेल के जरिए कैविएट पत्र भेजा था और बुधवार को व्यक्तिगत रूप से मिलकर यह अनुरोध किया कि यदि कोई दूसरा समूह पार्टी पर दावा करने या विलय संबंधी कोई प्रस्ताव लेकर आता है, तो पहले शिवसेना (UBT) का पक्ष सुना जाए।

देसाई ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें बताया है कि अभी तक किसी अन्य समूह ने उनसे संपर्क नहीं किया है और न ही कोई औपचारिक दावा उनके पास पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है, लेकिन यदि उनके पत्र की अनदेखी की जाती है तो कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पिछले कुछ दिनों से चल रही उन चर्चाओं को कारण माना जा रहा है जिनमें दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले भी पार्टी नेता संजय राउत ने आरोप लगाया था कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी धनराशि के प्रस्ताव दिए जा रहे हैं। राउत ने दावा किया था कि कुछ सांसदों को करोड़ों रुपये के ऑफर देकर पक्ष बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

शिवसेना (UBT) का कहना है कि दल-बदल कानून के तहत केवल सांसदों की संख्या पर्याप्त नहीं है। अनिल देसाई के अनुसार कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी वैध विलय के लिए दो शर्तें एक साथ पूरी होनी चाहिए—पहली, मूल राजनीतिक दल का विलय और दूसरी, उसके कम से कम दो-तिहाई सांसदों का उस विलय का समर्थन। केवल सांसदों का समूह अलग होकर नई राजनीतिक पहचान का दावा नहीं कर सकता।

यही वजह है कि उद्धव ठाकरे गुट किसी भी संभावित राजनीतिक या कानूनी चुनौती के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि यदि सांसदों का कोई समूह अलग होकर लोकसभा में अलग मान्यता मांगता है तो स्थिति जटिल हो सकती है। इसलिए स्पीकर को भेजे गए कैविएट पत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद यह शिवसेना के लिए दूसरा बड़ा झटका साबित हो सकता है। पहले ही पार्टी संगठन और विधानसभा में उसकी ताकत कमजोर हुई है। यदि लोकसभा में भी बड़ी संख्या में सांसद अलग होते हैं तो उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

हालांकि फिलहाल किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। यही कारण है कि स्थिति अभी अटकलों और राजनीतिक दावों तक सीमित है। लेकिन जिस तरह से पार्टी नेतृत्व लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है, स्पीकर से मुलाकात कर रहा है और कानूनी तैयारी की बात कर रहा है, उससे साफ है कि ठाकरे गुट इस खतरे को गंभीरता से ले रहा है।

उधर विपक्षी दलों ने भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी हुई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जबकि बीजेपी और शिंदे गुट ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है।

फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम और उन सांसदों की स्थिति पर टिकी हुई है जिनके बारे में बगावत की चर्चाएं चल रही हैं। यदि ये अटकलें सच साबित होती हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा भूचाल आ सकता है।

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