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ईरान पर हमलों में इस्तेमाल हुआ एलन मस्क का AI टूल Grok : अमेरिका

टेक्नोलॉजी | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 17 जून 2026

दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। अमेरिकी सरकार ने दावा किया है कि अरबपति उद्योगपति एलन मस्क की AI प्रणाली “Grok” का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में किया गया था।

यह जानकारी अमेरिकी सरकार द्वारा अदालत में दाखिल एक कानूनी दस्तावेज में सामने आई है। यह दस्तावेज एलन मस्क की AI कंपनी xAI के विशाल डेटा सेंटर से जुड़े एक पर्यावरणीय मामले में प्रस्तुत किया गया था। इसी दौरान सरकार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि Grok का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियानों में किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने तर्क दिया कि xAI का डेटा सेंटर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां विकसित AI तकनीक का इस्तेमाल रक्षा और सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। इसी संदर्भ में ईरान के खिलाफ हमलों में Grok के उपयोग का उल्लेख किया गया।

यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि अमेरिकी सेना या सुरक्षा एजेंसियां AI आधारित प्रणालियों का किस स्तर तक इस्तेमाल कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और लक्ष्य पहचानने, खुफिया जानकारी का विश्लेषण करने तथा सैन्य रणनीति बनाने में ऐसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसी साल फरवरी में अमेरिकी सरकार ने AI कंपनी Anthropic के साथ अपने कुछ अनुबंध समाप्त कर दिए थे। बताया गया कि Anthropic ने अपनी तकनीक को पूरी तरह स्वचालित सैन्य हमलों या बड़े पैमाने पर निगरानी के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सरकार ने अन्य AI विकल्पों की ओर रुख किया।

एलन मस्क की कंपनी xAI हाल के महीनों में तेजी से चर्चा में रही है। फरवरी में मस्क ने xAI को अपनी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX के साथ जोड़ दिया था। इसके बाद Grok को दुनिया की सबसे शक्तिशाली AI प्रणालियों में से एक बनाने की दिशा में काम तेज हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि AI का उपयोग सीधे सैन्य हमलों में किया जा रहा है, तो इससे कई नैतिक और कानूनी सवाल भी खड़े होते हैं। मानव नियंत्रण, जवाबदेही और युद्ध के नियमों को लेकर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ सकती है।

अमेरिकी सरकार के इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल चैटबॉट, शोध या व्यावसायिक कामों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

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