राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 15 जून 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते सुरक्षा संकट और हाल ही में ओमान तट के पास हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नौवहन महानिदेशालय (Directorate General of Shipping – DGS) ने समुद्री भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक भारतीय नाविकों को किसी भी संघर्ष क्षेत्र में तैनात न किया जाए।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास सुरक्षा हालात लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। हाल के महीनों में कई व्यापारिक जहाज हमलों और सैन्य गतिविधियों की चपेट में आए हैं, जिनमें भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं।
डीजीएस द्वारा जारी सुरक्षा परामर्श में कहा गया है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए समुद्री भर्ती और प्लेसमेंट एजेंसियां किसी भी भारतीय नाविक को युद्ध या संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में तैनात नहीं करेंगी। हालांकि आपातकालीन परिस्थितियों में चालक दल के बदलाव (क्रू चेंज) की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए संबंधित नाविकों की स्पष्ट सहमति आवश्यक होगी।
नौवहन महानिदेशालय ने खाड़ी क्षेत्र, होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे जुड़े समुद्री मार्गों पर संचालित जहाजों के कप्तानों को भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्हें सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी सभी चेतावनियों पर लगातार नजर रखने, जहाज की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने को कहा गया है।
यह सलाह उस दर्दनाक घटना के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें ओमान तट के पास एमटी सेटेबेलो नामक जहाज पर हुए अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इस घटना ने भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे और सरकार पर ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया था।
समुद्री क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला हजारों भारतीय नाविकों और उनके परिवारों को राहत देगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है और बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं। ऐसे में किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ता है।
उधर अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन भारत ने साफ संकेत दिया है कि जब तक सुरक्षा स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक भारतीय नाविकों की जान को जोखिम में नहीं डाला जाएगा।
सरकार का यह फैसला बताता है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा अब विदेश और समुद्री नीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।




