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G7 में मोदी-ट्रंप की मुलाकात तय! व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक संकटों पर होगी बड़ी चर्चा

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पेरिस/वॉशिंगटन | 14 जून 2026

भारत और अमेरिका के संबंधों को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण मुलाकात अगले सप्ताह फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान देखने को मिल सकती है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। हालांकि भारतीय पक्ष की ओर से अभी इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दोनों नेताओं के बीच संभावित मुलाकात को लेकर वैश्विक कूटनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह लंबी यात्रा पर रवाना हो गए। फ्रांस के एवियन शहर में 16 और 17 जून को आयोजित होने वाला G7 शिखर सम्मेलन इस बार कई वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक संकटों के बीच हो रहा है। ऐसे समय में मोदी और ट्रंप की मुलाकात को केवल भारत-अमेरिका संबंधों के नजरिए से नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के व्यापक संदर्भ में भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

व्यापार, रक्षा और इंडो-पैसिफिक पर हो सकती है चर्चा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बैठक होती है तो दोनों नेता व्यापार, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा है। दोनों देश क्वाड जैसे मंचों पर भी साथ काम कर रहे हैं और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं।

इसके अलावा अमेरिका द्वारा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और भारत को विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है। भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और अमेरिका उसे अपने प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।

हॉर्मुज संकट और पश्चिम एशिया युद्ध भी रहेंगे एजेंडे में

इस बार G7 सम्मेलन की सबसे बड़ी पृष्ठभूमि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष है। व्हाइट हाउस के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप सम्मेलन के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और माइंस हटाने (Demining Operations) के मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे। यह वही क्षेत्र है जहां हाल के दिनों में कई वाणिज्यिक जहाजों पर हमले हुए हैं और भारतीय नाविकों की मौत ने भारत की चिंता बढ़ा दी है।

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है। ऐसे में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था, तेल आयात और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस विषय पर भारत की चिंताओं को भी प्रमुखता से उठा सकते हैं।

‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनकर पहुंचे हैं मोदी

यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि G7 में भारत की लगातार आठवीं बार भागीदारी वैश्विक मंचों पर देश की बढ़ती प्रतिष्ठा और विश्व समुदाय के भरोसे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपने हितों की बात नहीं करेगा बल्कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आकांक्षाओं और चिंताओं को भी मजबूती से दुनिया के सामने रखेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट, तकनीकी असमानता और वित्तीय संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भारत की भूमिका इन देशों की आवाज को प्रमुख वैश्विक मंचों तक पहुंचाने की है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने G20, ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से उठाया है।

फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान फ्रांस को भारत की रणनीतिक सोच का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने याद दिलाया कि इसी वर्ष फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे और दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी (Special Global Strategic Partnership) के स्तर तक पहुंचाया था।

भारत और फ्रांस रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग के क्षेत्रों में लंबे समय से करीबी साझेदार रहे हैं। राफेल लड़ाकू विमानों से लेकर हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त रणनीति तक दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को और नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है।

दुनिया की नजरें मोदी-ट्रंप मुलाकात पर

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बड़े घटनाक्रम एक साथ चल रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ऊर्जा सुरक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसे मुद्दों के बीच होने वाली मोदी-ट्रंप मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। दोनों नेताओं की व्यक्तिगत केमिस्ट्री पहले भी कई बार वैश्विक सुर्खियां बटोर चुकी है और यदि फ्रांस में यह बैठक होती है तो इससे भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी महत्वपूर्ण संदेश जाएगा।

G7 शिखर सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक पहल एक बार फिर यह संकेत दे रही है कि विश्व राजनीति में भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है।

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