अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 13 जून 2026
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना अब तक का सबसे कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ हुई बातचीत में साफ कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी का कोई भी उल्लंघन और ईरानी तेल के अवैध परिवहन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिका ने सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निर्देश दिया है कि वे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों के आदेशों का तत्काल पालन करें, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि विदेश मंत्री रुबियो ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की और इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को आवश्यक बताया। बयान में कहा गया कि अमेरिका किसी भी ऐसे जहाज या गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी घोषित नाकाबंदी को चुनौती दे या ईरान के साथ प्रतिबंधित तेल व्यापार में शामिल हो। यह बयान ऐसे समय आया है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार सैन्य तनाव बढ़ रहा है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच यह बातचीत उस समय हुई जब हाल ही में ओमान की खाड़ी में हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री के समक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाते हुए स्पष्ट शब्दों में विरोध दर्ज कराया। जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के खिलाफ घातक सैन्य कार्रवाई किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती। उन्होंने भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने नागरिकों और समुद्री व्यापारिक हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान समय में वैश्विक राजनीति का सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। दुनिया के लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार का रास्ता इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में अमेरिका द्वारा लागू की गई नाकाबंदी और ईरान द्वारा उसका विरोध पूरे विश्व की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। हाल के दिनों में कई तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं, जिनके लिए अमेरिका और ईरान एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने हॉर्मुज से गुजर रहे जहाजों को निशाना बनाने वाले कई ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं, जबकि तेहरान इन आरोपों को खारिज कर रहा है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी भारतीय नाविकों की मौत वाले हमले की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करने की अपील की है। भारत सरकार ने भी समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को अलर्ट जारी किया है और भारतीय जहाजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का यह नया बयान केवल सुरक्षा संबंधी चेतावनी नहीं बल्कि ईरान पर दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। एक ओर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका हॉर्मुज पर अपनी सैन्य पकड़ मजबूत करने का संदेश दे रहा है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि किसी भी संभावित समझौते के बावजूद अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपना प्रभाव और नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। इसका सीधा असर भारत सहित उन सभी देशों पर पड़ सकता है जो पश्चिम एशिया से तेल और गैस आयात करते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। इसलिए नई दिल्ली के लिए यह केवल कूटनीतिक या सुरक्षा चुनौती नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक चिंता का विषय भी है।
पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही वार्ताओं पर टिकी हुई हैं। यदि शांति समझौता होता है तो यह पश्चिम एशिया को बड़े युद्ध से बचा सकता है, लेकिन यदि तनाव और बढ़ा तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। ऐसे में रुबियो का यह बयान आने वाले दिनों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।




