अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन/इस्लामाबाद | 13 जून 2026
पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी भीषण संघर्ष के बीच एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदें लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नई सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को फिर से बढ़ा दिया है। शनिवार को अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने वाले कई ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों पक्ष लगातार यह कह रहे हैं कि युद्ध समाप्त करने वाला समझौता पहले से कहीं अधिक करीब पहुंच चुका है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने के उद्देश्य से कई “वन-वे अटैक ड्रोन” लॉन्च किए थे। अमेरिकी सेना का दावा है कि सभी ड्रोन को समय रहते मार गिराया गया और समुद्री यातायात बिना किसी बाधा के जारी रहा। दूसरी ओर ईरान ने इस दावे पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उसने अमेरिकी आरोपों और हालिया सैन्य कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रचार करार दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाल सकता है।
इस बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने वाले समझौते का अंतिम प्रारूप तैयार हो चुका है और अगले 24 घंटों के भीतर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। हालांकि कुछ ही घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि तथाकथित “इस्लामाबाद मेमोरेंडम” पर 14 जून को हस्ताक्षर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में समझौता संभव है, लेकिन दूसरी तरफ की झिझक को देखते हुए किसी निश्चित तारीख की घोषणा करना जल्दबाजी होगी। इस बयान ने यह संकेत दिया कि शांति प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी भी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका और ईरान कभी भी समझौते के इतने करीब नहीं पहुंचे थे जितने आज हैं। उनके अनुसार “इस्लामाबाद समझौता” अंतिम चरण में है और इसके पूरा होते ही सभी विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस बयान को अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा किया, जिससे यह संकेत मिला कि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया गंभीर स्तर पर जारी है। हालांकि इसके समानांतर सैन्य घटनाओं का जारी रहना यह भी दर्शाता है कि जमीनी हालात अब भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।
विवाद का एक और बड़ा मुद्दा भारतीय जहाजों पर कथित हमलों को लेकर सामने आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले ईरान द्वारा किए गए हैं और इसे उन्होंने “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया। लेकिन तेहरान ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। ईरानी दूतावास ने कहा कि ट्रंप का बयान “पूरी तरह निराधार” है और यह उन अमेरिकी हमलों से ध्यान भटकाने की कोशिश है जिनमें इस सप्ताह ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई। ईरान का कहना है कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाइयों की जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।
भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर उन हमलों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया जिनमें भारतीय नाविकों की जान गई थी। जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस प्रकार की घातक सैन्य कार्रवाई किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती। वहीं अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी के किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन करना होगा। इस बयान ने क्षेत्र में समुद्री स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
उधर लेबनान मोर्चे पर भी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के लगभग 20 क्षेत्रों और नबातियेह शहर के निवासियों को तत्काल क्षेत्र खाली करने की चेतावनी जारी की। चेतावनी के कुछ ही समय बाद इजरायली वायुसेना ने कई स्थानों पर हवाई हमले किए। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार कई गांवों में बमबारी हुई जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई। इसी दौरान लेबनानी सेना ने दक्षिणी गांव कफर तेबनित स्थित अपने सैन्य ठिकाने से सैनिकों को हटा लिया, क्योंकि इजरायली सेना उस क्षेत्र के करीब पहुंच गई थी। हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने दक्षिणी लेबनान में आगे बढ़ रही इजरायली सेना को रॉकेट और हथियारों की मदद से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
इस पूरे संकट के बीच एक और महत्वपूर्ण घोषणा ईरान की ओर से आई। ईरान ने बताया कि फरवरी में अमेरिकी और इजरायली हमलों में मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से शुरू होगा और 9 जुलाई को मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। खामेनेई की मृत्यु को ईरानी क्रांति के बाद के सबसे बड़े राजनीतिक और धार्मिक घटनाक्रमों में से एक माना जा रहा है। उनकी मौत के बाद ईरान की राजनीति, सुरक्षा व्यवस्था और विदेश नीति में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति एक जटिल विरोधाभास को दर्शाती है। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें अपने चरम पर हैं, तो दूसरी ओर हॉर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव जारी है। यही कारण है कि विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में समझौता हो भी जाता है, तब भी क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना आसान नहीं होगा। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद मध्यस्थता, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और संभावित अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इन घटनाओं का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ने वाला है।




