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बागियों के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता का थामा हाथ, TMC संकट के बीच दीदी को मिला बड़ा सहारा

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता/नई दिल्ली | 11 जून 2026

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक भूचाल के बीच एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। जहां पार्टी के कई सांसदों और विधायकों के बागी खेमे में जाने की चर्चाएं तेज हैं, वहीं आसनसोल से सांसद और वरिष्ठ अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कर दिया है कि वे ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उनके इस बयान को ऐसे समय में ममता बनर्जी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जब पार्टी लगातार टूट और बगावत की खबरों से जूझ रही है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 सांसदों के बागी गुट के संपर्क में होने के दावे किए जा रहे हैं। दूसरी ओर राज्यसभा में भी लगातार इस्तीफों ने नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे माहौल में शत्रुघ्न सिन्हा का सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा जताना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब उनके राजनीतिक जीवन में कठिन दौर आया था, तब ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था और इसलिए वह भी मुश्किल समय में ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने साफ कर दिया कि उनके भाजपा या एनडीए में लौटने की अटकलों का कोई आधार नहीं है और वे टीएमसी में ही बने रहेंगे।

गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा छोड़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे। भाजपा में रहते हुए वे पटना साहिब से सांसद रहे, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने ममता बनर्जी का हाथ थाम लिया था। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें आसनसोल से चुनाव लड़ाया और संसद तक पहुंचाया। यही वजह है कि उनके हालिया बयान को व्यक्तिगत निष्ठा और राजनीतिक प्रतिबद्धता दोनों के रूप में देखा जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भी दावा किया था कि शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि उनकी और शत्रुघ्न सिन्हा की बातचीत हुई है तथा ममता बनर्जी से भी उनकी चर्चा कराई गई है। अब स्वयं शत्रुघ्न सिन्हा के बयान ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा के इस समर्थन के बावजूद टीएमसी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। पार्टी के भीतर कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच बढ़ता टकराव, बागी सांसदों की सक्रियता, राज्यसभा से इस्तीफे और विधायकों की नाराजगी लगातार पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शत्रुघ्न सिन्हा का साथ ममता बनर्जी के लिए मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक संबल अवश्य है, लेकिन इससे पार्टी के भीतर चल रहा नेतृत्व संकट पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।

बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी अपने पुराने और भरोसेमंद नेताओं को साथ लेकर पार्टी को फिर से एकजुट कर पाएंगी या फिर बगावत की यह आग आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगी। इतना तय है कि जहां एक ओर कई नेता टीएमसी से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा ने सार्वजनिक रूप से यह संदेश दे दिया है कि संकट की इस घड़ी में वे “दीदी” के साथ मजबूती से खड़े हैं।

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