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AI का डर, ‘साइलेंट छंटनी’ का दौर: चीन में कर्मचारियों की जगह ले रहे हैं रोबोट, कंपनियां चुपचाप घटा रही हैं नौकरियां

साइंस एंड टेक्नोलॉजी/ रोजगार / अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 11 जून 2026

चीन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की तेज़ रफ्तार अब लाखों कर्मचारियों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कंपनियां खुलकर बड़े पैमाने पर छंटनी करने के बजाय “साइलेंट लेऑफ” यानी चुपचाप कर्मचारियों को बाहर करने की रणनीति अपना रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक विस्तृत रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि चीन की कई बड़ी टेक, विज्ञापन और मनोरंजन कंपनियां AI टूल्स को अपनाने के बाद कर्मचारियों की संख्या धीरे-धीरे कम कर रही हैं ताकि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया से बचा जा सके।

हांगझोउ की 26 वर्षीय कंटेंट ऑपरेशन प्रोफेशनल लियू का कहना है कि उनकी कंपनी ने मार्च से ही AI एजेंट ‘OpenClaw’ को लागू करने के बाद कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया। लियू के मुताबिक कर्मचारियों से कहा गया कि वे अपने पूरे कार्यप्रवाह (Workflow) को AI सिस्टम में फीड करें। इसके बाद वही AI अधिकांश काम खुद करने लगा और कर्मचारियों की आवश्यकता कम हो गई। लियू का कहना है कि एक बार जब कर्मचारी अपना पूरा ज्ञान और कार्यप्रणाली AI को सिखा देते हैं, तो कंपनी उन्हें आसानी से बाहर कर सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार चीन सरकार एक तरफ AI क्रांति को तेज़ी से आगे बढ़ाना चाहती है ताकि उत्पादकता और आर्थिक विकास को गति मिल सके, लेकिन दूसरी तरफ वह बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और सामाजिक असंतोष से भी बचना चाहती है। यही वजह है कि कंपनियां पश्चिमी देशों की तरह हजारों कर्मचारियों की एकमुश्त छंटनी करने के बजाय धीरे-धीरे भर्ती रोकने, अनुबंध समाप्त करने और कर्मचारियों के प्राकृतिक पलायन (Attrition) का इंतजार करने जैसी रणनीतियां अपना रही हैं।

चीन के श्रम कानून भी कंपनियों को बड़े स्तर पर छंटनी करने से रोकते हैं। यदि किसी कंपनी को अपने 10 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को निकालना हो तो उसे सरकारी अनुमति लेनी पड़ती है। इसके अलावा चीन की अदालतें कई मामलों में यह फैसला दे चुकी हैं कि केवल AI से प्रतिस्थापित करने के उद्देश्य से कर्मचारियों को हटाना गैरकानूनी हो सकता है। यही कारण है कि कंपनियां इस बदलाव को बेहद सावधानी से लागू कर रही हैं।

रॉयटर्स से बात करने वाले एक बड़े चीनी फिनटेक समूह के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चीन की लगभग सभी बड़ी टेक कंपनियों में AI आधारित पुनर्गठन शुरू हो चुका है। मार्केटिंग, कंटेंट, ग्राहक सेवा और कई फ्रंट-एंड जॉब्स पहले ही AI के हवाले किए जा चुके हैं। वहीं Alibaba के क्लाउड डिवीजन के एक इंजीनियर ने भी स्वीकार किया कि कंपनी के कुछ विभागों में AI के कारण कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है, हालांकि यह प्रक्रिया धीरे-धीरे चल रही है।

AI का प्रभाव केवल टेक सेक्टर तक सीमित नहीं है। चीन का तेजी से बढ़ता माइक्रो-ड्रामा और डिजिटल मनोरंजन उद्योग भी इससे प्रभावित हुआ है। 22 वर्षीय निर्माता आयासे ने बताया कि उनकी कंपनी के एक प्रोडक्शन विभाग में पहले 30 से 40 कर्मचारी काम करते थे। AI आधारित वर्चुअल अभिनेता और डिजिटल सेट आने के बाद वही विभाग अब केवल 10 कर्मचारियों तक सीमित रह गया है। कई मामलों में वास्तविक कलाकारों और तकनीकी स्टाफ की जरूरत लगभग समाप्त हो चुकी है। आयासे खुद फरवरी में नौकरी गंवा चुकी हैं।

AI का प्रभाव अब कर्मचारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन तक पहुंच गया है। कई कंपनियां कर्मचारियों के AI उपयोग को मापने के लिए ‘टोकन यूसेज’ जैसे नए मानक अपना रही हैं। बीजिंग की एक बड़ी टेक कंपनी के डेटा इंजीनियर ने बताया कि उनके विभाग में कर्मचारियों की रैंकिंग इस आधार पर की जा रही है कि वे AI का कितना उपयोग करते हैं। यही आंकड़े अब प्रमोशन और परफॉर्मेंस रिव्यू को भी प्रभावित कर रहे हैं। कर्मचारियों में यह डर बढ़ रहा है कि यदि वे AI का उपयोग नहीं करेंगे तो पीछे रह जाएंगे, और यदि बहुत अधिक उपयोग करेंगे तो खुद अपनी नौकरी के विकल्प तैयार कर देंगे।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चीन को सबसे बड़ी चुनौती रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिल सकती है। सरकार की ‘AI Plus’ योजना के तहत 2027 तक प्रमुख क्षेत्रों में 70 प्रतिशत और 2030 तक 90 प्रतिशत AI अपनाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन नई नौकरियां बनने की गति उतनी तेज़ नहीं है जितनी तेजी से पुरानी नौकरियां समाप्त हो रही हैं। यही वजह है कि युवा बेरोजगारी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

सिटीबैंक की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार चीन में लगभग 7 करोड़ नौकरियां AI के कारण उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में पहुंच सकती हैं। यह कुल रोजगार का लगभग 9.6 प्रतिशत हिस्सा है। 20 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के कर्मचारियों के लिए यह जोखिम और भी अधिक है। इसी दौरान चीन में 1 करोड़ 27 लाख नए विश्वविद्यालय स्नातक नौकरी बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, जबकि शुरुआती वेतन और रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी AI को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। चीन के लोकप्रिय प्लेटफॉर्म रेडनोट पर “AI Anxiety” हैशटैग को 78 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। लोग बहस कर रहे हैं कि क्या AI उसी तरह नौकरियां खत्म कर देगा जैसे औद्योगिक क्रांति के दौरान मशीनों ने पारंपरिक बुनकरों और कारीगरों की आजीविका समाप्त कर दी थी।

चीन सरकार और सरकारी मीडिया लगातार लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं कि AI उनका “रोज़गार छीनने” नहीं बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने आया है। लेकिन ज़मीनी स्तर पर बढ़ती छंटनियां, घटती भर्ती और कर्मचारियों की बेचैनी यह संकेत दे रही है कि AI क्रांति का संक्रमण काल चीन के लिए आर्थिक ही नहीं, सामाजिक और राजनीतिक चुनौती भी बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले पांच वर्षों में चीन दुनिया की सबसे बड़ी AI शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा, लेकिन इस यात्रा की सबसे बड़ी कीमत शायद उसके करोड़ों कर्मचारियों को चुकानी पड़ सकती है, जिनकी जगह धीरे-धीरे मशीनें ले रही हैं।

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