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नेपाल में सड़क बनी नहीं, करोड़ों निकल गए! कोशी प्रांत में ‘बिलों के खेल’ ने खोली सिस्टम की पोल

अंतरराष्ट्रीय/ नेपाल | ABC NATIONAL NEWS | विराटनगर/ओखलढुंगा (नेपाल) | 11 जून 2026

नेपाल के कोशी प्रांत में सड़क निर्माण परियोजनाओं के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। महालेखा परीक्षक (Auditor General) की ताज़ा रिपोर्ट ने ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने विकास परियोजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मोरंग और ओखलढुंगा के अवसंरचना विकास कार्यालयों ने सड़क निर्माण कार्यों में वास्तविक काम से अधिक भुगतान किया, अनुबंध में मौजूद नहीं होने वाली सुविधाओं का लाभ ठेकेदारों को दिया और बिलों में ऐसे अंतर पैदा किए, जिनसे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार केवल दो जिलों की परियोजनाओं में ही 2 करोड़ 25 लाख नेपाली रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान सामने आया है। महालेखा परीक्षक ने इस रकम की तत्काल वसूली के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़क निर्माण कार्यों के लिए भुगतान केवल वास्तविक माप और अनुबंध की शर्तों के आधार पर होना चाहिए था, लेकिन कई मामलों में नियमों को दरकिनार कर भुगतान जारी किए गए। इससे यह आशंका भी पैदा हुई है कि कहीं यह महज प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला तो नहीं।

सबसे चौंकाने वाला मामला ओखलढुंगा जिले की मानेभञ्ज्यांग– मोलुङ खोला– सिकापु सड़क परियोजना से जुड़ा है। वर्ष 2022 में शुरू हुई इस परियोजना की लागत 31 करोड़ 32 लाख नेपाली रुपये निर्धारित की गई थी। योजना के तहत चार किलोमीटर सड़क का डामरीकरण और छह किलोमीटर सड़क का ग्रेवल निर्माण होना था। लेकिन चार साल बाद भी सड़क का डामरीकरण शुरू नहीं हो पाया है। इसके बावजूद निर्माण कंपनी सिंह एंड ब्रदर्स बिबाश जेवी को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा चुका है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार अनुबंध की शर्तों में मूल्य समायोजन (Price Adjustment) का कोई प्रावधान नहीं था, फिर भी कंपनी को 92 लाख 34 हजार नेपाली रुपये अतिरिक्त दे दिए गए। महालेखा परीक्षक ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन बताते हुए राशि वापस लेने का आदेश दिया है।

ओखलढुंगा अवसंरचना विकास कार्यालय के प्रमुख सुरेश प्रसाद साह का कहना है कि परियोजना में लगभग 62 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है और अब तक करीब 19 करोड़ नेपाली रुपये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि कार्यालय खुद यह स्वीकार कर चुका है कि निर्माण कंपनी की लापरवाही और लगातार देरी के कारण परियोजना समयसीमा से काफी पीछे चल रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब काम अधूरा था तो भुगतान किस आधार पर जारी किए गए।

मोरंग जिले की भौन्ने-अमतोला सड़क परियोजना में भी कम गंभीर अनियमितताएं नहीं मिलीं। लगभग 16 करोड़ 63 लाख नेपाली रुपये की इस परियोजना में ऑडिट टीम ने पाया कि डामरीकरण सामग्री की मात्रा को वास्तविक माप से तीन गुना अधिक दिखाया गया। जहां केवल 141.66 घन मीटर कार्य दर्ज होना चाहिए था, वहां 446.52 घन मीटर काम दिखाकर भुगतान कर दिया गया। इस हेरफेर के कारण करीब 44 लाख 78 हजार नेपाली रुपये अतिरिक्त जारी किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक खरीद नियमावली के अनुसार भुगतान केवल वास्तविक माप के आधार पर होना चाहिए, लेकिन इस परियोजना में कागजों पर काम बढ़ाकर सरकारी धन निकाला गया।

मोरंग की ही बार्जु-गढी सड़क परियोजना में भी लाखों रुपये की अतिरिक्त राशि ठेकेदार को मिल गई। लगभग 31 करोड़ 64 लाख नेपाली रुपये की इस परियोजना में दसवें बिल तक 28 करोड़ 58 लाख रुपये का भुगतान हो चुका था। लेकिन 11वें रनिंग बिल की गणना के दौरान पुराने भुगतान का हिसाब जोड़ने में ऐसी त्रुटि हुई कि निर्माण कंपनी को 52 लाख 21 हजार नेपाली रुपये अतिरिक्त मिल गए। महालेखा परीक्षक ने इस भुगतान को भी अनुचित मानते हुए वसूली का आदेश दिया है।

ऑडिट रिपोर्ट में दो अन्य मामलों का भी उल्लेख है, जहां मूल्य समायोजन की गणना में कम कटौती की गई और लगभग 34 लाख नेपाली रुपये अतिरिक्त जारी कर दिए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या किसी एक परियोजना तक सीमित नहीं थी, बल्कि भुगतान और बिलिंग व्यवस्था में व्यापक स्तर पर खामियां मौजूद थीं।

मोरंग अवसंरचना विकास कार्यालय के प्रमुख खरणन्द इसर ने कहा है कि महालेखा परीक्षक द्वारा इंगित सभी मामलों की समीक्षा की जाएगी और संबंधित निर्माण कंपनियों को नोटिस भेजे जाएंगे। यदि कंपनियां रकम वापस नहीं करती हैं तो उनकी सुरक्षा जमा राशि से पैसा काटकर सरकारी कोष में जमा कराया जाएगा। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रकम की वसूली पर्याप्त नहीं होगी। यह भी जांच होनी चाहिए कि भुगतान की स्वीकृति किस स्तर पर दी गई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार थे।

भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ‘सिटिजन वॉचडॉग सोसाइटी अगेंस्ट करप्शन’ के सचिव लीला धुंगेल ने कहा कि वास्तविक कार्य से अधिक मात्रा दिखाकर भुगतान लेना सीधे-सीधे सार्वजनिक धन की लूट है। उन्होंने कहा कि वर्षों से ऐसी प्रवृत्ति विकसित हो गई है जिसमें जमीन पर जितना काम होता है, कागजों में उससे कहीं अधिक दिखाकर बिल बना दिए जाते हैं। धुंगेल ने मांग की कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

कोशी प्रांत की इन सड़क परियोजनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास के नाम पर खर्च होने वाला सार्वजनिक धन आखिर किस हद तक सुरक्षित है। सड़कें अधूरी हैं, काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ, लेकिन भुगतान लगातार जारी रहे। महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने फिलहाल करोड़ों रुपये के इस ‘बिल गेम’ का पर्दाफाश कर दिया है, अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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