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TMC में महाबगावत! 20 सांसदों के NDA संपर्क से ममता पर सबसे बड़ा सियासी संकट, कल्याण बनर्जी बोले- ‘अब उनके नेता नरेंद्र मोदी हैं’

राजनीति | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 9 जून 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है, जहां से राज्य की सत्ता और राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति दोनों के समीकरण बदल सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़े पैमाने पर असंतोष और संभावित बगावत की खबरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियों को अचानक बढ़ा दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की इच्छा जताई है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसदों में से बड़ा हिस्सा पार्टी से अलग हो सकता है। ऐसा होने पर यह केवल टीएमसी के लिए ही नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन के लिए भी एक बड़ा झटका माना जाएगा।

इस संभावित बगावत के बीच टीएमसी नेतृत्व ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी के लोकसभा मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं, वे अब तृणमूल कांग्रेस के नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “आज उनके नेता नरेंद्र मोदी हैं, वे व्यावहारिक रूप से बीजेपी बन चुके हैं।” कल्याण बनर्जी का यह बयान दर्शाता है कि पार्टी नेतृत्व बगावत की खबरों को बेहद गंभीरता से ले रहा है और सार्वजनिक रूप से बागी नेताओं को घेरने की रणनीति अपना रहा है।

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कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। उन्होंने इस मुलाकात को पार्टी विरोधी गतिविधि करार देते हुए आरोप लगाया कि कुछ सांसद लंबे समय से संगठन के खिलाफ काम कर रहे हैं और अब उनका राजनीतिक झुकाव खुलकर सामने आ गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद भी मौजूद रहे। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिया कि संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक और राजनीतिक कार्रवाई की जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीएमसी सांसद यूसुफ पठान का नाम भी प्रमुखता से चर्चा में है। हालांकि यूसुफ पठान ने अब तक पार्टी छोड़ने या किसी नए राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनका नाम संभावित बागी सांसदों की सूची में लगातार लिया जा रहा है। दूसरी ओर टीएमसी की वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता के बीच जाकर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सांसद जनता के वोट से चुने गए हैं, किसी दूसरे दल के टिकट पर नहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी के भीतर वास्तव में इतनी बड़ी टूट होती है तो इसका सीधा असर ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका पर पड़ेगा। लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 12 सांसद हैं। ऐसे में 20 सांसदों का अलग होना न केवल संसद में पार्टी की ताकत को कमजोर करेगा, बल्कि INDIA गठबंधन के भीतर ममता बनर्जी की राजनीतिक हैसियत और प्रभाव पर भी असर डाल सकता है। यही कारण है कि विपक्षी राजनीति में इस घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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हालांकि अभी तक बागी खेमे की ओर से कोई औपचारिक सामूहिक घोषणा नहीं की गई है और न ही किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही बैठकों, राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टीएमसी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल दबाव की राजनीति है, या फिर पश्चिम बंगाल में किसी बड़े सत्ता परिवर्तन की भूमिका तैयार हो रही है? क्या ममता बनर्जी इस संभावित बगावत को रोक पाएंगी, या फिर टीएमसी को अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ेगा? फिलहाल पूरे देश की नजर बंगाल की राजनीति पर टिकी हुई है, जहां हर गुजरते दिन के साथ सियासी घटनाक्रम और अधिक दिलचस्प होता जा रहा है।

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