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INDIA जनबंधन बैठक में 23 दल शामिल, मतभेदों के बीच विपक्ष ने दिखाई एकजुटता

राष्ट्रीय/नई दिल्ली | राजनीतिक ब्यूरो | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 जून 2026

विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की प्रस्तावित ‘INDIA जनबंधन’ बैठक से पहले गठबंधन के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच कांग्रेस ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। कांग्रेस ने दावा किया है कि सोमवार को नई दिल्ली में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में 23 विपक्षी दल भाग लेंगे। पार्टी का कहना है कि जो सहयोगी दल किसी कारणवश बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं, उन्होंने भी नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना स्पष्ट और मजबूत विरोध दर्ज कराया है तथा विपक्षी एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब INDIA गठबंधन कई राजनीतिक चुनौतियों और आंतरिक असहमतियों का सामना कर रहा है। गठबंधन के प्रमुख घटकों में शामिल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के बीच हुए राजनीतिक समीकरणों को लेकर DMK ने नाराजगी जताई है और बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। DMK का आरोप है कि कांग्रेस का यह कदम गठबंधन की भावना के विपरीत है और इसे राजनीतिक विश्वासघात के रूप में देखा जाना चाहिए।

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व इन मतभेदों को अस्थायी और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्षी दलों के बीच व्यापक सहमति बनी हुई है। कांग्रेस का दावा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, संघीय ढांचे, आर्थिक नीतियों, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सभी विपक्षी दल एक समान सोच रखते हैं और यही साझा एजेंडा आगामी बैठक का प्रमुख आधार होगा।

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच संवाद जारी रहना लोकतांत्रिक राजनीति के लिए आवश्यक है। पार्टी का कहना है कि गठबंधन की बैठकों का उद्देश्य केवल चुनावी रणनीति बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना भी है। इसी कारण बैठक में शामिल होने वाले 23 दल केंद्र सरकार की नीतियों पर चर्चा करेंगे और संसद से लेकर सड़कों तक संयुक्त संघर्ष की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों में बदलते राजनीतिक समीकरणों ने INDIA गठबंधन के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। तमिलनाडु, झारखंड, पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्यों में क्षेत्रीय दल अपने-अपने राजनीतिक हितों और रणनीतियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के मुकाबले एक साझा विपक्षी मंच बनाए रखने की आवश्यकता को अधिकांश दल स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि मतभेदों के बावजूद गठबंधन पूरी तरह टूटता हुआ नजर नहीं आ रहा।

बैठक में भाग लेने वाले दलों के बीच आगामी संसद सत्र, महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, कृषि संकट, केंद्र-राज्य संबंधों और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर भी विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। कांग्रेस चाहती है कि INDIA गठबंधन एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में अपनी उपस्थिति बनाए रखे और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति के साथ आगे बढ़े।

हालांकि विपक्षी खेमे के भीतर जारी असहमतियां इस बैठक पर भी प्रभाव डाल सकती हैं। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि गठबंधन की वास्तविक मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके घटक दल स्थानीय राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय स्तर की साझेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। फिलहाल कांग्रेस ने 23 दलों की भागीदारी का दावा कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि INDIA गठबंधन अभी भी सक्रिय है और केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त राजनीतिक संघर्ष जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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नई दिल्ली में होने वाली यह बैठक विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठकों में से एक मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मतभेदों के बावजूद क्या विपक्षी दल एक साझा राजनीतिक एजेंडा और मजबूत एकता का प्रदर्शन कर पाते हैं या नहीं।

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