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होर्मुज पर ईरान का सख्त संदेश: “जलडमरूमध्य हमारा अधिकार”, लेबनान में कार्रवाई बढ़ी तो होगा बड़ा जवाब

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन | 2 जून 2026

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपने रणनीतिक और सुरक्षा हितों पर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना ईरान का अधिकार है तथा लेबनान में बढ़ती सैन्य कार्रवाई को तेहरान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। रज़ाई के इस बयान ने पहले से सुलग रहे पश्चिम एशिया संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है।

मोहसिन रज़ाई का यह बयान ऐसे समय आया है जब इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष लगातार तेज हो रहा है तथा अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ताएं भी लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंच गई हैं। ईरान ने पहले ही संकेत दे दिया है कि यदि लेबनान में इज़राइली सैन्य अभियान और आगे बढ़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है। रज़ाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लेबनान के खिलाफ बढ़ती कार्रवाई केवल एक स्थानीय संघर्ष नहीं है बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित करने वाली घटना है और ईरान इसे अनदेखा नहीं करेगा।

दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले इस समुद्री मार्ग से दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार का अवरोध या सैन्य तनाव पैदा होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। यही कारण है कि ईरान की ओर से होर्मुज को लेकर दिए गए हर बयान पर दुनिया की निगाहें टिकी रहती हैं।

सूत्रों के अनुसार ईरान ने अमेरिका के साथ चल रहे अप्रत्यक्ष संवाद और संदेशों के आदान-प्रदान को भी अस्थायी रूप से रोक दिया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका लेबनान में इज़राइल की कार्रवाई को रोकने में विफल रहा है और क्षेत्र में तनाव कम करने के बजाय परिस्थितियां और जटिल होती जा रही हैं। ईरान का मानना है कि यदि युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन होता है तो उसका प्रभाव केवल एक मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के इस कड़े रुख का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी दर्ज की गई है और निवेशकों के बीच आशंका है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और बढ़ा तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। अमेरिका, यूरोप, चीन, भारत और जापान जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों की अर्थव्यवस्थाएं इस मार्ग की निर्बाध आवाजाही पर काफी हद तक निर्भर हैं।

दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन लगातार कूटनीतिक समाधान की कोशिशों में जुटा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि उन्होंने इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच तनाव कम कराने के लिए महत्वपूर्ण बातचीत की है। हालांकि जमीनी हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संघर्षविराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं।

पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि लेबनान, इज़राइल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक महत्व का विषय बन चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में मोहसिन रज़ाई का यह बयान केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि दुनिया की महाशक्तियों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि यदि लेबनान संकट और गहराया तो उसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

वर्तमान परिस्थितियों में दुनिया की निगाहें तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में लिए गए फैसले न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता की दिशा भी तय कर सकते हैं।

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