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एंड्रयू विवाद में नया खुलासा: 30,000 ईमेल छह साल पहले ही बकिंघम पैलेस को सौंपे गए थे

अंतरराष्ट्रीय डेस्क | ABC NATIONAL NEWS | लंदन | 31 मई 2026

ब्रिटेन के शाही परिवार से जुड़े विवादों में एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। अदालत के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर (पूर्व प्रिंस एंड्रयू) की विवादित वित्तीय गतिविधियों और सरकारी गोपनीय सूचनाओं के कथित आदान-प्रदान से जुड़े लगभग 30,000 ईमेल का एक विशाल संग्रह वर्ष 2020 में ही बकिंघम पैलेस को सौंप दिया गया था।

इन ईमेलों को शाही परिवार के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक लॉर्ड चेम्बरलेन को उपलब्ध कराया गया था। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर के खिलाफ सार्वजनिक पद के दुरुपयोग (Misconduct in Public Office) के आरोपों की पुलिस जांच जारी है और पुलिस ने हाल ही में लोगों से अतिरिक्त जानकारी देने की अपील भी की है।

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार यह ईमेल संग्रह एक कारोबारी संपर्क के अकाउंट से प्राप्त हुआ था और इसमें वर्ष 2013 तक की बातचीत शामिल थी। हाई कोर्ट के फैसलों में उल्लेख है कि मई 2020 में इन ईमेलों की एक प्रति लॉर्ड चेम्बरलेन को दी गई थी और जुलाई 2020 तक इन्हें बकिंघम पैलेस पहुंचा दिया गया था।

इन ईमेलों के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें कथित तौर पर उस समय की बातचीत शामिल थी जब एंड्रयू ब्रिटेन के व्यापार दूत (Trade Envoy) के रूप में कार्यरत थे। प्रकाशित दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने 2010 में ब्रिटिश ट्रेजरी से प्राप्त एक गोपनीय आर्थिक ब्रीफिंग निजी कारोबारी संपर्क जोनाथन रोलैंड के साथ साझा की थी। यह ब्रीफिंग आइसलैंड के बैंकिंग संकट से संबंधित थी।

विवाद का केंद्र रोलैंड परिवार और बैंके हैविलैंड (Banque Havilland) से जुड़े वित्तीय संबंध भी हैं। बाद में इस बैंक को ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के नियामकों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। अमेरिकी “एपस्टीन फाइल्स” में भी एंड्रयू और रोलैंड परिवार के बीच निकट संबंधों का उल्लेख किया गया था।

बकिंघम पैलेस ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा है कि चूंकि पुलिस जांच जारी है, इसलिए इस विषय पर कोई सार्वजनिक बयान देना उचित नहीं होगा।

इस बीच कई सांसदों और सार्वजनिक जीवन के विशेषज्ञों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है। यॉर्क सेंट्रल से सांसद रैचल मैस्केल ने कहा कि शाही परिवार से जुड़े जवाबदेही तंत्र की समीक्षा की जानी चाहिए और संसद की संयुक्त समिति द्वारा मामले की जांच होनी चाहिए।

पूर्व शाही प्रेस सचिव ऐल्सा एंडरसन ने भी इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह शाही प्रतिष्ठान के लिए एक और बड़ा झटका होगा।

गौरतलब है कि किंग चार्ल्स के शासनकाल में एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को पहले ही कई शाही उपाधियों और आधिकारिक भूमिकाओं से वंचित किया जा चुका है। उनकी गिरफ्तारी के बाद राजमहल की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया था कि “कानून को अपना काम करने दिया जाएगा।”

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 30,000 ईमेलों के इस संग्रह की जानकारी बकिंघम पैलेस को छह वर्ष पहले मिलने के बावजूद इन पर क्या कार्रवाई हुई और क्या इन दस्तावेजों में मौजूद जानकारी वर्तमान पुलिस जांच को प्रभावित कर सकती है। जांच एजेंसियों और शाही परिवार दोनों पर अब पारदर्शिता को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है।

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