अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 26 मई 2026
चीन और पाकिस्तान के रिश्ते एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। बीजिंग में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping ने दोनों देशों की दोस्ती को “अटूट” और “हर मौसम की साझेदारी” बताया। ऐसे समय में यह मुलाकात हुई है जब पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और पाकिस्तान अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई इस अहम बैठक में शी जिनपिंग ने शहबाज शरीफ को “पुराना दोस्त” बताते हुए कहा कि चीन और पाकिस्तान ने दशकों से हर मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे भी बदलें, चीन हमेशा पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देता रहेगा। चीन ने यह भी साफ संकेत दिया कि वह पाकिस्तान के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी चीन को पाकिस्तान का “आयरन ब्रदर” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की दुनिया में कोई बराबरी नहीं कर सकता। उनके साथ पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir भी मौजूद थे, जिन्हें हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभाने वाला चेहरा माना जा रहा है।
इस मुलाकात का सबसे बड़ा पहलू पश्चिम एशिया संकट और ईरान युद्ध को लेकर दिखा। पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिशों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। चीन ने भी पाकिस्तान की इस भूमिका की खुलकर सराहना की। शी जिनपिंग ने कहा कि पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए “रचनात्मक भूमिका” निभाई है और चीन इस प्रयास का समर्थन करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस पूरे संकट में पर्दे के पीछे अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है। ईरान के साथ चीन के गहरे संबंध हैं और पाकिस्तान उसका करीबी सहयोगी है। ऐसे में चीन चाहता है कि पश्चिम एशिया में कोई ऐसा संकट न बढ़े जिससे ऊर्जा सप्लाई और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चीन बेहद सतर्क दिखाई दे रहा है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह मुलाकात सिर्फ दोस्ती का प्रदर्शन नहीं बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का बड़ा संकेत है। एक तरफ अमेरिका अपने गठबंधनों को मजबूत करने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ चीन-पाकिस्तान धुरी भी नई रणनीतिक ताकत के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। खासकर भारत, अमेरिका और पश्चिम एशिया की राजनीति के बीच यह साझेदारी आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या पाकिस्तान और चीन मिलकर अमेरिका-ईरान तनाव को कम कराने में सफल होंगे या फिर पश्चिम एशिया का संकट और गहराएगा।




