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ईरान-अमेरिका वार्ता में “हल्की प्रगति”, पाकिस्तान बना मध्यस्थ; पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार

अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन / तेहरान | 22 मई 2026

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ चल रही वार्ता में “हल्की प्रगति” होने का दावा किया है, हालांकि उन्होंने साफ कहा कि अभी किसी अंतिम समझौते की गारंटी नहीं दी जा सकती। दूसरी ओर पाकिस्तान अब खुलकर मध्यस्थ की भूमिका में सामने आ गया है और उसके गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ 24 घंटे के भीतर दूसरी बार अहम बैठक की।

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कई प्रस्ताव रखे हैं। दोनों देशों के नेताओं ने क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता कायम करने के संभावित तंत्रों पर भी चर्चा की। Geo News और ईरानी मीडिया के अनुसार बातचीत का केंद्र युद्धविराम को स्थायी समाधान में बदलना था।

उधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि बातचीत में “थोड़ी हलचल” दिखी है, लेकिन स्थिति अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि “गंभीर बातचीत” के चलते उन्होंने फिलहाल ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोक रखी है। हालांकि ट्रंप लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि यदि समझौता नहीं हुआ तो युद्ध दोबारा भड़क सकता है।

इस बीच पश्चिम एशिया में हालात अब भी विस्फोटक बने हुए हैं। लेबनान में इजरायली हमलों में कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें राहतकर्मी और बच्चे भी शामिल बताए गए हैं। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद लेबनानी सेना ने बयान जारी कर कहा कि उसके सैनिक केवल राष्ट्र और सेना के प्रति वफादार हैं।

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संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते की संभावना “50-50” है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युद्ध का दूसरा चरण शुरू हुआ तो क्षेत्रीय अस्थिरता और गहरी हो सकती है। गरगाश ने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक समाधान को केवल अस्थायी युद्धविराम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि तनाव की जड़ों को भी संबोधित करना होगा।

ईरान ने इस बीच अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने आदेश दिया है कि देश का संवर्धित यूरेनियम विदेश नहीं भेजा जाएगा। इसे अमेरिका की प्रमुख मांगों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन अब ईरान के यूरेनियम भंडार पर और अधिक नियंत्रण चाहता है।

अमेरिका और NATO के बीच भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। मार्को रुबियो ने NATO सहयोगियों पर ईरान युद्ध में पर्याप्त समर्थन न देने को लेकर नाराजगी जताई। वहीं ट्रंप ने पोलैंड में अतिरिक्त 5,000 अमेरिकी सैनिक भेजने की घोषणा कर यूरोप में नई रणनीतिक बहस छेड़ दी है।

युद्ध का असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। तेल आपूर्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ रही है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया संकट से भारत के रोजगार, निर्यात और प्रवासी आय पर भी दबाव बढ़ रहा है। Gulf देशों से लौट रहे कामगारों और घटते निर्यात ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

इस बीच हज यात्रा पर भी युद्ध की छाया दिखाई दे रही है। लाखों मुस्लिम श्रद्धालु मक्का पहुंच रहे हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा चिंताओं का माहौल बना हुआ है। Saudi अरब प्रशासन कोशिश कर रहा है कि धार्मिक यात्रा युद्ध की राजनीति से प्रभावित न हो।

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फिलहाल दुनिया की नजरें तेहरान, वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच चल रही वार्ताओं पर टिकी हैं। यदि बातचीत सफल होती है तो पश्चिम एशिया को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन अगर वार्ता विफल हुई तो क्षेत्र एक और बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

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