राष्ट्रीय | सुमन कुमार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 मई 2026
केंद्र सरकार ने देश की सीमाओं और जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को साफ शब्दों में कहा कि अब केवल घुसपैठ रोकना ही नहीं, बल्कि देश में मौजूद हर घुसपैठिए की पहचान कर उसे बाहर निकालना सरकार की प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी “अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन” को स्वीकार नहीं करेगा और इसके लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन शुरू करने जा रही है।
नई दिल्ली में आयोजित सीमा सुरक्षा बल (BSF) के Investiture Ceremony और रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाओं को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए “स्मार्ट बॉर्डर कॉन्सेप्ट” लागू किया जाएगा। इस परियोजना के तहत पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर ड्रोन, हाई-टेक रडार, अत्याधुनिक कैमरे, सेंसर और डिजिटल निगरानी तंत्र तैनात किए जाएंगे ताकि घुसपैठ और तस्करी के हर रास्ते को बंद किया जा सके।
अमित शाह ने कहा कि सीमाई सुरक्षा अब केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक आधारित सुरक्षा मॉडल अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना है कि सीमावर्ती संवेदनशील इलाकों की पूरी डिजिटल मैपिंग कर BSF को उपलब्ध कराई जाए ताकि हर गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सके। उन्होंने इसे “नए भारत की स्मार्ट सुरक्षा नीति” बताया।
गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में अवैध घुसपैठ, जनसंख्या संतुलन और सीमा सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। खासतौर पर बांग्लादेश सीमा से जुड़े राज्यों और संवेदनशील क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। अमित शाह ने संकेत दिए कि सरकार अब इस मुद्दे पर केवल बयानबाजी नहीं बल्कि निर्णायक कार्रवाई के मूड में है।
उन्होंने BSF जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा केवल सैन्य जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्तित्व और सामाजिक संतुलन से जुड़ा विषय है। शाह ने कहा कि भारत की सीमाएं अब “मानव सतर्कता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी” दोनों के संयुक्त मॉडल पर सुरक्षित की जाएंगी, ताकि दुश्मन देशों की हर गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
अमित शाह ने यह भी कहा कि सरकार सीमा सुरक्षा के साथ-साथ देश के अंदर अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान प्रक्रिया को भी और तेज करेगी। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार जल्द ही राज्यों के साथ मिलकर एक व्यापक सत्यापन अभियान चला सकती है, जिसमें डिजिटल पहचान, दस्तावेज सत्यापन और नागरिक रिकॉर्ड की जांच शामिल होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल सुरक्षा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। सरकार की ओर से “अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन” शब्द का इस्तेमाल यह संकेत देता है कि केंद्र अब सीमा सुरक्षा को सीधे सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता से जोड़कर देख रहा है।
सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और राष्ट्रीय पहचान को लेकर अमित शाह का यह आक्रामक रुख आने वाले महीनों में देश की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




