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“ट्रंप की लोकप्रियता या रिपब्लिकन की चिंता?” — अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले GOP में बढ़ी बेचैनी

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 18 मई 2026

अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनावों में अभी करीब छह महीने का समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक माहौल अभी से गर्म हो चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बार खुद चुनाव मैदान में नहीं हैं, फिर भी रिपब्लिकन पार्टी यानी GOP के लिए सबसे बड़ा चेहरा और सबसे बड़ा जोखिम दोनों वही बने हुए हैं। NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर के रिपब्लिकन नेताओं और पार्टी रणनीतिकारों के बीच इस बात को लेकर गहरी चर्चा चल रही है कि क्या ट्रंप की लोकप्रियता पार्टी को कांग्रेस में बहुमत बचाने में मदद करेगी या फिर उनकी विवादित राजनीति पार्टी पर भारी पड़ सकती है।

पिछले कुछ महीनों में रिपब्लिकन पार्टी को कई स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी लगातार यह नैरेटिव बनाने में जुटी है कि ट्रंप प्रशासन महंगाई, ईरान युद्ध और आर्थिक दबाव को नियंत्रित करने में असफल रहा है। ट्रंप की गिरती approval ratings और लगातार बढ़ती जीवन-यापन लागत ने भी रिपब्लिकन खेमे की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राजनीति का इतिहास भी यही कहता है कि जो पार्टी व्हाइट हाउस में होती है, उसे मिडटर्म चुनावों में अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है।

हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद रिपब्लिकन नेताओं के भीतर पूरी तरह निराशा नहीं है। पार्टी का मानना है कि सीमा सुरक्षा, टैक्स कटौती और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर वह अभी भी अमेरिकी मतदाताओं के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकती है। कई GOP नेताओं का दावा है कि ट्रंप प्रशासन ने “बाइडेन युग” की तुलना में बेहतर आर्थिक और सुरक्षा नीतियां दी हैं। पार्टी को यह भरोसा भी है कि हालिया अदालत फैसलों के बाद निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन यानी redistricting में उन्हें राजनीतिक फायदा मिल सकता है।

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रिपब्लिकन पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ट्रंप समर्थक वोटर बिना ट्रंप के बैलेट पर आए मतदान के लिए बाहर निकलेंगे या नहीं। 2016 के बाद से ट्रंप ने बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं को सक्रिय किया जो पहले राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेते थे। लेकिन अनुभव यह भी रहा है कि जब ट्रंप खुद चुनाव नहीं लड़ते, तो वही वोटर मतदान से दूरी बना लेते हैं। यही कारण है कि GOP अब “MAGA base” को चुनाव तक सक्रिय बनाए रखने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार कई रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ट्रंप को लगातार अर्थव्यवस्था, टैक्स राहत और रोजगार जैसे मुद्दों पर फोकस करना चाहिए। पार्टी के भीतर यह भी चिंता है कि ट्रंप कई बार ऐसे विवादों में उलझ जाते हैं जो आम मतदाताओं को पसंद नहीं आते। हाल ही में व्हाइट हाउस में नए बॉलरूम निर्माण, गोल्डन ट्रंप स्टैच्यू और अन्य “symbolic projects” को लेकर भी कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब आम अमेरिकी महंगाई और ईंधन कीमतों से जूझ रहे हों, तब ऐसे मुद्दे जनता को पार्टी से दूर कर सकते हैं।

ईरान युद्ध भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। ट्रंप का “America First” समर्थक वर्ग लंबे समय से विदेशी युद्धों से दूरी बनाए रखने की बात करता रहा है। लेकिन अब ईरान संघर्ष तीसरे महीने में पहुंच चुका है और इसका असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था तथा तेल कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। कई रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो मिडटर्म चुनावों में पार्टी को नुकसान हो सकता है।

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इसके बावजूद GOP को एक बड़ा फायदा फंडिंग के मोर्चे पर मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक रिपब्लिकन संगठनों के पास फिलहाल डेमोक्रेट्स की तुलना में कहीं ज्यादा चुनावी फंड मौजूद है। रिपब्लिकन समर्थक संस्थाओं के पास लगभग 843 मिलियन डॉलर की नकदी बताई जा रही है, जबकि डेमोक्रेटिक खेमे के पास यह आंकड़ा काफी कम है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह आर्थिक बढ़त चुनाव प्रचार में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

रिपब्लिकन रणनीतिकारों का मानना है कि 2026 का चुनाव केवल कांग्रेस की सीटों का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह ट्रंप की राजनीतिक ताकत का भी बड़ा परीक्षण साबित होगा। खुद ट्रंप ने हाल ही में कहा — “मैं बैलेट पर नहीं हूं, लेकिन मेरे वोटर मुझे ही देखते हैं।” यही वजह है कि अमेरिकी राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या ट्रंप की लोकप्रियता GOP को जीत दिलाएगी या उनकी विवादित शैली पार्टी के लिए बोझ बन जाएगी।

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