मनोरंजन | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 17 मई 2026
तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी मसाला फिल्म से कम नहीं लग रही। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां इंटरवल के बाद हीरो मुख्यमंत्री बन गया… और बाकी सुपरस्टार अब प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहानी समझा रहे हैं!
सुपरस्टार रजनीकांत ने जब कहा कि “विजय के मुख्यमंत्री बनने पर मैं चौंक गया”, तो सोशल मीडिया ने तुरंत मान लिया कि शायद थलाइवा ने टीवी ऑन किया होगा, न्यूज़ देखी होगी और हाथ से कॉफी का कप गिर गया होगा। हालांकि रजनीकांत ने तुरंत सफाई भी दे दी कि “भाई, जलन-वेलन कुछ नहीं है… बस लड़का बहुत तेज निकला!”
रजनीकांत ने बड़ी सादगी से कहा कि उनके और विजय के बीच 28 साल का जेनरेशन गैप है। यानी जिस समय रजनीकांत स्क्रीन पर विलेन को हवा में उछाल रहे थे, उस समय शायद विजय स्कूल में उपस्थिति लगा रहे होंगे। लेकिन राजनीति ने ऐसा ट्विस्ट मारा कि अब वही “यंग स्टार” मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा है और पुराने सुपरस्टार राजनीतिक गणित समझने में लगे हैं।
मामला तब और मजेदार हो गया जब रजनीकांत ने कमल हासन का नाम लेते हुए कहा, “अगर कमल हासन CM बनते तो लोग सोचते कि मुझे जलन हो सकती है…” बस फिर क्या था! सोशल मीडिया ने इस लाइन को ऐसे पकड़ा जैसे साउथ की फिल्म में कॉमेडियन पंचलाइन पकड़ता है। कुछ लोगों ने लिखा — “तमिलनाडु में अब दोस्ती भी सिनेमैटिक यूनिवर्स बन चुकी है।”
एक यूज़र ने मजाक में लिखा —
“रजनीकांत: मुझे जलन नहीं है।
सोशल मीडिया: यही तो सबसे खतरनाक डायलॉग होता है!”
उधर विजय भी पूरे “एक्शन मोड” में हैं। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने विभाग बांट दिए, मीटिंग कर ली, फाइलें निपटा दीं। लोग कह रहे हैं कि भाई ने राजनीति में भी वही एंट्री मारी है जैसी फिल्मों में स्लो मोशन में मारते थे — बैकग्राउंड में म्यूजिक, सामने विरोधी और जनता सीटियां बजाती हुई।
कमल हासन के फैंस भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दिया — “थोड़ा इंतजार कीजिए… असली स्क्रिप्ट अभी बाकी है।” यानी तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह मल्टीस्टारर फिल्म बन चुकी है, जहां हर प्रेस कॉन्फ्रेंस ट्रेलर जैसी लग रही है।
दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु में राजनीति और सिनेमा का रिश्ता इतना पुराना है कि यहां चुनावी भाषण भी कभी-कभी फिल्म के क्लाइमैक्स जैसे लगते हैं। एमजीआर से लेकर जयललिता तक… और अब विजय तक… जनता यहां नेता कम, सुपरस्टार ज्यादा चुनती दिखाई देती है।
फिलहाल जनता मजे ले रही है, सोशल मीडिया मीम्स बना रहा है और राजनीतिक विश्लेषक सिर पकड़कर समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह लोकतंत्र है, फिल्मफेयर अवॉर्ड है या किसी OTT सीरीज का नया सीजन!
एक बात तो तय है — तमिलनाडु की राजनीति में अब “कट… रीटेक…” नहीं चलने वाला। यहां हर बयान सीधे वायरल होता है… और हर मुस्कान में लोग अगला राजनीतिक ट्विस्ट खोजने लगते हैं।




