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महंगाई का नया झटका! पेट्रोल-डीजल के बाद अब खाने-पीने की चीजें भी हो सकती हैं महंगी

बिजनेस | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026

देश में बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की चिंता और बढ़ा दी है। पेट्रोल-डीजल, गैस और रोजमर्रा के खर्च पहले से ही लोगों की जेब पर भारी पड़ रहे थे, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। भारत में अप्रैल 2026 के दौरान थोक महंगाई दर यानी WPI बढ़कर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव, महंगा कच्चा तेल और कमजोर होता रुपया आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकते हैं।

आर्थिक जानकारों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो उसका असर देश में ईंधन कीमतों पर पड़ता है। रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल महीने में फ्यूल और पावर सेक्टर में महंगाई दर 24.7 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।

सबसे ज्यादा असर विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर देखा गया, जिसकी कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और मिट्टी के तेल की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब ईंधन महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ जाती है और इसका असर धीरे-धीरे हर उत्पाद पर दिखाई देने लगता है।

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महंगाई की मार केवल ईंधन तक सीमित नहीं है। धातुओं यानी मेटल्स की बढ़ती कीमतों ने भी उद्योगों की लागत बढ़ा दी है। एल्युमिनियम और कॉपर जैसे धातु महंगे होने से मशीनरी, टेक्सटाइल, केमिकल और दवा उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में इलेक्ट्रॉनिक सामान, घरेलू उपकरण और कई रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

हालांकि फिलहाल खाद्य महंगाई पूरी तरह बेकाबू नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर मानसून कमजोर रहा या वैश्विक खाद्य संकट गहराया, तो सब्जियां, दूध, अंडे, मांस, मछली और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। कई शहरों में पहले से ही सब्जियों और डेयरी उत्पादों की कीमतें बढ़ने लगी हैं।

इस बीच रुपये की कमजोरी भी सरकार और बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है और इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए, तो भारत में आने वाले महीनों में महंगाई और अधिक दबाव बना सकती है।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार आम लोगों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। घर का बजट, यात्रा खर्च, बिजली बिल और रोजमर्रा की जरूरतें पहले से ज्यादा महंगी पड़ सकती हैं। ऐसे में सरकार के सामने महंगाई को नियंत्रित करने और आम आदमी को राहत देने की बड़ी चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है।

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