शिक्षा/अपराध | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 मई 2026
पुणे का केमिस्ट्री लेक्चरर गिरफ्तार, अब तक 8 आरोपी हिरासत में
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ा ब्रेकथ्रू मिला है। एजेंसी ने पुणे के केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है, जिसे इस पूरे पेपर लीक रैकेट का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। सीबीआई का दावा है कि कुलकर्णी को परीक्षा के प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच हासिल थी और वह National Testing Agency (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। इस गिरफ्तारी के साथ अब तक इस मामले में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि पी.वी. कुलकर्णी कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया में शामिल था और इसी वजह से उसे प्रश्नपत्रों की जानकारी पहले से मिल जाती थी। एजेंसी के मुताबिक अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में उसने अपने नेटवर्क के जरिए छात्रों को जुटाना शुरू किया। इस काम में उसकी मदद मनीषा वाघमारे नाम की महिला ने की, जिसे सीबीआई ने 14 मई को गिरफ्तार किया था। मनीषा पुणे में ब्यूटी सैलून चलाती थी, लेकिन जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह छात्रों और अभिभावकों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर रही थी।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई छोटा स्थानीय गिरोह नहीं बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क था, जिसमें परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पहले ही बाहर पहुंचाई जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक कुछ छात्रों और अभिभावकों से मोटी रकम लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप है। हालांकि सीबीआई अभी तक पूरे आर्थिक लेन-देन और नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।
NEET-UG देश की सबसे प्रतिष्ठित और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए यह परीक्षा देते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबर ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई शहरों में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। छात्रों का कहना है कि मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर पड़ा है।
सीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर प्रश्नपत्र लीक का नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला हुआ था और क्या इसमें परीक्षा से जुड़े अन्य अधिकारी या संस्थागत लोग भी शामिल थे। एजेंसी को शक है कि यह रैकेट केवल एक शहर तक सीमित नहीं था बल्कि कई राज्यों में सक्रिय संपर्कों के जरिए संचालित किया जा रहा था। जांच में डिजिटल डिवाइस, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और व्हाट्सऐप चैट्स को भी खंगाला जा रहा है।
इस पूरे मामले ने National Testing Agency की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि देश में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता कमजोर होती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आने के बाद अब NEET-UG विवाद ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गर्मा गया है। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में लगातार लापरवाही सामने आ रही है। वहीं केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर परीक्षा प्रणाली में शामिल लोगों की मिलीभगत साबित होती है, तो यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था पर गहरा संकट माना जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच एजेंसियां इस रैकेट की जड़ों तक पहुंच पाएंगी या फिर मामला कुछ गिरफ्तारियों तक सीमित रह जाएगा। फिलहाल देशभर के लाखों छात्र और अभिभावक इस जांच के अगले चरण पर नजर बनाए हुए हैं।




