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10 साल में 89 बार : अबकी बार पेपर लीक सरकार, भारत को चाहिए पेपरलीक पर चर्चा — कांग्रेस

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 मई 2026

पेपर लीक माफिया को कौन बचा रहा?

कांग्रेस ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा है कि केंद्र में अबकी बार पेपर लीक सरकार है जिसके 10 साल के शासन के दौरान 89 बार पेपर्स लीक हुए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देश में लगातार हो रहे अलग अलग परीक्षाओं के पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया है, लेकिन सरकार असली दोषियों तक पहुंचने के बजाय केवल छोटे आरोपियों को पकड़कर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया अभियान के जरिए केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि “भारत को अब परीक्षा पर नहीं, पेपर लीक पर चर्चा चाहिए।” पार्टी ने तंज कसते हुए नारा दिया — “अबकी बार पेपर लीक सरकार।” इसके साथ ही कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर “पेपर लीक माफिया को कौन बचा रहा है?” इस बीच, बीजेपी से जुड़े जिस आरोपी दिनेश बिंवाल को गिरफ्तार किया गया था उसने कहा है कि NEET पेपर लीक में ‘बड़े लोगों’ को बचाया जा रहा है।

विपक्ष का दावा है कि NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तार बीजेपी नेता दिनेश बिंवाल ने पूछताछ के दौरान “बड़े लोगों” को बचाए जाने की बात कही है। इसी बयान को आधार बनाकर कांग्रेस ने जांच एजेंसियों और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका नहीं होती, तो जांच अब तक असली मास्टरमाइंड तक पहुंच चुकी होती।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन हर बार केवल छोटे स्तर के लोगों को गिरफ्तार कर मामले को सीमित कर दिया गया। पार्टी का कहना है कि चाहे भर्ती परीक्षाएं हों, मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट हों या सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं, हर जगह संगठित पेपर लीक नेटवर्क सक्रिय दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, परिवार अपनी जमा पूंजी बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है, लेकिन पेपर लीक माफिया पूरे सिस्टम को कमजोर कर रहा है। पार्टी का आरोप है कि सरकार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है।

विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस पूरे नेटवर्क में किसी मंत्री, बड़े बीजेपी नेता या वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका है, जिसे छिपाने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस का कहना है कि जांच एजेंसियां केवल “प्यादों” तक सीमित हैं, जबकि “वजीर” अब भी बाहर घूम रहे हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक संभव ही नहीं हो सकता।

कांग्रेस ने कहा कि NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में कथित गड़बड़ी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के अनुसार इस मामले ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा तोड़ा है और युवाओं के भीतर गुस्सा बढ़ाया है। विपक्ष का दावा है कि यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं बल्कि पूरे भर्ती और परीक्षा तंत्र में फैले भ्रष्टाचार का संकेत है।

पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कहा कि जब तक पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं होगा और बड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक छात्रों का भरोसा वापस नहीं लौटेगा। कांग्रेस नेताओं ने यह भी मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आने वाले समय में पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक अभियान बना सकती है। युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर देशभर में लगातार विरोध और नाराजगी देखने को मिल रही है।

हालांकि Bharatiya Janata Party और केंद्र सरकार की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बीजेपी लगातार यह कहती रही है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का दावा है कि पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

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