[the_ad id="179"]
Home » Politics » पवन खेड़ा से फिर पूछताछ, 25 मई को दोबारा पेश होने का समन

पवन खेड़ा से फिर पूछताछ, 25 मई को दोबारा पेश होने का समन

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | गुवाहाटी | 15 मई 2026

पवन खेड़ा से असम पुलिस ने लगातार दूसरे दिन लंबी पूछताछ की और अब उन्हें 25 मई को फिर से पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने खुद बताया कि असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आगे की जांच के लिए उन्हें दोबारा बुलाया है। इस पूरे घटनाक्रम ने असम से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

गुवाहाटी स्थित असम पुलिस क्राइम ब्रांच कार्यालय में गुरुवार को पवन खेड़ा से कई घंटों तक पूछताछ हुई। इससे पहले बुधवार को भी उनसे करीब 12 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए थे। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों से जुड़ा हुआ है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब पवन खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेशों में कथित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद मुख्यमंत्री की पत्नी ने पवन खेड़ा और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की और अब पूछताछ का सिलसिला लगातार जारी है।

क्राइम ब्रांच दफ्तर से बाहर निकलने के बाद पवन खेड़ा ने कहा कि वह कानून का सम्मान करते हैं और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनसे कुछ दस्तावेज मांगे हैं जिन्हें वह उपलब्ध कराएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी पुष्टि की कि उन्हें 25 मई को दोबारा पेश होने के लिए कहा गया है।

इस बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस मामले को लेकर राजनीतिक अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “असम के पेड़े बहुत अच्छे होते हैं।” राजनीतिक हलकों में इसे पवन खेड़ा पर कटाक्ष के तौर पर देखा गया। इससे पहले भी सरमा चुनाव नतीजों के बाद कह चुके हैं कि “फिल्म अभी बाकी है”, जिसे कांग्रेस ने राजनीतिक धमकी जैसा बयान बताया था।

मामले ने कानूनी मोर्चे पर भी लंबा रास्ता तय किया है। पवन खेड़ा को शुरुआत में तेलंगाना हाईकोर्ट से सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिली थी, लेकिन असम पुलिस ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट बेल पर रोक लगाते हुए उन्हें गौहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया।

इसके बाद गौहाटी हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। फिर पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें राहत मिली। शीर्ष अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत देते हुए जांच में सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर असम पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि जांच प्रक्रिया में सहयोग करना उनकी जिम्मेदारी है।

इसी दौरान असम पुलिस ने कोर्ट से पवन खेड़ा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग भी की थी, लेकिन कामरूप मेट्रो के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उस मांग को अस्वीकार कर दिया। इसके बावजूद पुलिस जांच जारी रखे हुए है और अब दोबारा समन जारी होने से मामला और संवेदनशील हो गया है।

कांग्रेस इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्षी नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं बीजेपी का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी बिना सबूत गंभीर आरोप लगाने की छूट नहीं दी जा सकती।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अब केवल कानूनी मामला नहीं रह गया है बल्कि असम और राष्ट्रीय राजनीति की बड़ी लड़ाई का हिस्सा बन चुका है। एक ओर हिमंत बिस्वा सरमा अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण लगातार चर्चा में रहते हैं, वहीं कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है। अब नजर 25 मई पर टिकी है, जब पवन खेड़ा एक बार फिर असम पुलिस के सामने पेश होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *