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बैटिंग करो और चिल करो…— इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर संजय मांजरेकर का बड़ा सवाल

खेल | अमरनाथ प्रसाद | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 15 मई 2026

आईपीएल 2026 में इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने इस नियम पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह युवा भारतीय खिलाड़ियों के ओवरऑल डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने खासतौर पर राजस्थान रॉयल्स के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें इस सीजन में केवल बल्लेबाज के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लंबे समय में उनके क्रिकेट करियर के लिए सही संकेत नहीं है।

संजय मांजरेकर का मानना है कि इम्पैक्ट प्लेयर नियम ने टी-20 क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा आसान बना दिया है। उन्होंने कहा कि अब कई खिलाड़ी सिर्फ बल्लेबाजी करते हैं और फिर मैदान से बाहर जाकर आराम करते हैं। मांजरेकर ने तंज भरे अंदाज में कहा, “बैटिंग करो और चिल करो।” उनके मुताबिक, यह मॉडल दर्शकों के लिए भले रोमांचक लगे, लेकिन इससे खिलाड़ियों की तकनीकी और मानसिक मजबूती प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि एक असली क्रिकेटर वही होता है जो बल्लेबाजी के साथ-साथ मैदान पर दबाव भी झेले। फील्डिंग केवल एक अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं बल्कि खिलाड़ी के मानसिक विकास का अहम हिस्सा होती है। कैच पकड़ना, बाउंड्री रोकना, दबाव में रन बचाना और लंबे समय तक मैदान पर सक्रिय रहना किसी भी क्रिकेटर को मजबूत बनाता है।

मांजरेकर ने पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग उन्हें सिर्फ बल्लेबाजी के लिए नहीं बल्कि मैदान पर उनके पूरे व्यक्तित्व के लिए याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इंजमाम की फील्डिंग भले परफेक्ट नहीं मानी जाती थी, लेकिन दर्शकों ने हमेशा उनका पूरा क्रिकेटर वाला पक्ष देखा। वहीं आज के कई युवा खिलाड़ी केवल बल्लेबाजी तक सीमित होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों को लगातार फील्डिंग से दूर रखना उन्हें “कम्पलीट क्रिकेटर” बनने से रोक सकता है। मांजरेकर का मानना है कि शुरुआती उम्र में खिलाड़ियों को हर परिस्थिति का अनुभव मिलना जरूरी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में केवल बल्लेबाजी कौशल काफी नहीं होता। वहां फिटनेस, फील्डिंग, दबाव झेलने की क्षमता और मैच अवेयरनेस भी उतनी ही अहम होती है।

आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम लागू होने के बाद से टीमों को रणनीतिक फायदा जरूर मिला है। कई फ्रेंचाइजी अतिरिक्त बल्लेबाज या गेंदबाज का इस्तेमाल कर मैच का रुख बदलने में सफल रही हैं। लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञों का एक वर्ग लगातार कह रहा है कि इससे ऑलराउंडर खिलाड़ियों की भूमिका कम हो रही है और युवा खिलाड़ी खेल के केवल एक हिस्से तक सीमित होते जा रहे हैं।

मांजरेकर ने यह भी कहा कि आसान सफलता और जल्दी पैसा खिलाड़ियों की मानसिकता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर युवा खिलाड़ी केवल एक कौशल के भरोसे आगे बढ़ेंगे तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर क्रिकेट जगत पहले भी बंटा हुआ नजर आया है। कुछ पूर्व खिलाड़ी इसे आधुनिक क्रिकेट की जरूरत बताते हैं, जबकि कई दिग्गज इसे पारंपरिक क्रिकेटिंग स्किल्स के लिए खतरा मानते हैं। अब संजय मांजरेकर के बयान के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या आईपीएल का यह नियम भारतीय क्रिकेट को भविष्य में मजबूत बनाएगा या फिर अधूरे खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करेगा।

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