शिक्षा | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 मई 2026
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 आखिरकार एक WhatsApp मैसेज की वजह से बेनकाब हो गई। करोड़ों रुपये के कथित पेपर लीक नेटवर्क, गेस पेपर माफिया और संगठित परीक्षा घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब सोशल मीडिया और WhatsApp ग्रुप्स में तेजी से फॉरवर्ड हो रहा एक संदिग्ध मैसेज जांच एजेंसियों की नजर में आया।
यही वह मैसेज था जिसने पूरे देश को हिला दिया और अंततः NEET UG 2026 परीक्षा रद्द करनी पड़ी। अब CBI इस मामले की जांच कर रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक परीक्षा से कुछ घंटे पहले कई राज्यों में छात्रों और कोचिंग नेटवर्क के बीच एक “गेस पेपर” वायरल हुआ था। शुरुआत में इसे सामान्य अफवाह माना गया, लेकिन परीक्षा समाप्त होने के बाद जब छात्रों ने वायरल सवालों की तुलना असली प्रश्नपत्र से की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बताया जा रहा है कि वायरल दस्तावेज के 100 से ज्यादा सवाल असली परीक्षा से मैच कर रहे थे।
सबसे पहले राजस्थान में यह मामला गंभीर हुआ। वहां पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG को एक ऐसा WhatsApp मैसेज मिला जिसे “Forwarded Many Times” टैग के साथ हजारों लोगों तक भेजा गया था। इसी मैसेज में कथित तौर पर परीक्षा से जुड़े सवाल और पैटर्न मौजूद थे। जांच एजेंसियों ने जब इसकी डिजिटल ट्रेल खंगाली, तो मामला बेहद बड़ा निकलता गया।
बताया जा रहा है कि यह मैसेज सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं था, बल्कि कुछ कोचिंग सेंटर, एजेंट और कथित शिक्षा माफिया से जुड़े लोगों के नेटवर्क तक भी पहुंचा था। जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर लीक का यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ हो सकता है।
इसके बाद राजस्थान SOG ने कई संदिग्धों से पूछताछ शुरू की और कुछ डिजिटल डिवाइस जब्त किए। शुरुआती जांच में मिले इनपुट इतने गंभीर थे कि केंद्र सरकार को मामला CBI को सौंपना पड़ा। अब CBI WhatsApp चैट, Telegram ग्रुप, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और संदिग्ध कोचिंग कनेक्शन की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर लीक सिर्फ तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि एक सुनियोजित संगठित रैकेट हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक लाखों रुपये लेकर परीक्षा से पहले सवाल उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था। कुछ छात्रों और अभिभावकों से भी पूछताछ की जा सकती है।
NEET UG 2026 रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। लाखों छात्र अब दोबारा परीक्षा देने को मजबूर होंगे। कई छात्रों ने कहा कि वे महीनों से दिन-रात तैयारी कर रहे थे, लेकिन सिस्टम की नाकामी ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
सोशल मीडिया पर #NEETScam, #NTAFail और #JusticeForStudents जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि हर साल किसी न किसी परीक्षा में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार सामने आ जाता है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता।
NTA ने बयान जारी कर कहा है कि परीक्षा की “पवित्रता और निष्पक्षता” बनाए रखने के लिए NEET UG 2026 को रद्द किया गया है। एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि री-एग्जाम जल्द कराया जाएगा और छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी। हालांकि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा अब गंभीर रूप से हिल चुका है।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली “पेपर माफिया” के कब्जे में जा रही है। कई नेताओं ने शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की बात कही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं बल्कि भारत की पूरी प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली के लिए खतरे की घंटी है। जब देश के सबसे बड़े एंट्रेंस एग्जाम का पेपर WhatsApp पर घूमने लगे, तो यह सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही — तीनों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या CBI इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर पाएगी? और क्या देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा फिर से शिक्षा व्यवस्था पर लौट पाएगा?




