राष्ट्रीय / तमिलनाडु | ABC NATIONAL NEWS | 12 मई 2026
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक नया नैरेटिव तेजी से उभर रहा है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन को “हारकर भी किंगमेकर” बता रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि स्टालिन ने अपनी राजनीतिक रणनीति के जरिए BJP को सत्ता से दूर रखने में बड़ी भूमिका निभाई और अभिनेता-राजनेता थलपति विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार के गठन का रास्ता आसान किया।सोशल मीडिया पोस्ट्स और राजनीतिक चर्चाओं में यह कहा जा रहा है कि DMK के पास सत्ता में वापसी का मौका था और अगर स्टालिन चाहते तो दोबारा मुख्यमंत्री बन सकते थे। कुछ यूजर्स का दावा है कि TVK को गठबंधन के लिए मजबूर करने की राजनीतिक क्षमता भी DMK के पास थी, लेकिन स्टालिन ने अलग रास्ता चुना।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनाव के दौरान DMK और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर लगातार तनाव की खबरें सामने आती रहीं। कई मौकों पर स्टालिन ने सार्वजनिक मंचों से कांग्रेस की आलोचना भी की। लेकिन अब सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि यह सब एक “राजनीतिक रणनीति” का हिस्सा था ताकि विपक्षी वोट पूरी तरह बंटने के बजाय BJP के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक संतुलन में बदल सकें।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि स्टालिन ने पर्दे के पीछे कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी को TVK के साथ संवाद के लिए प्रेरित किया ताकि BJP को सत्ता से दूर रखा जा सके। हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही कांग्रेस, DMK या TVK की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक बयान सामने आया है।
इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा तब मिली जब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद थलपति विजय ने स्टालिन से उनके आवास जाकर मुलाकात की और आशीर्वाद लिया। दोनों नेताओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। समर्थकों ने इसे “तमिल राजनीति की नई एकजुटता” बताया, जबकि BJP समर्थकों ने इसे विपक्षी दलों की “राजनीतिक सेटिंग” करार दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु में BJP अभी भी संगठनात्मक रूप से उतनी मजबूत स्थिति में नहीं पहुंच पाई है जितनी उत्तर भारत के कई राज्यों में है। द्रविड़ राजनीति, क्षेत्रीय पहचान और भाषा आधारित भावनाएं अब भी राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। ऐसे में TVK, DMK और कांग्रेस जैसे दलों के बीच किसी भी तरह का अप्रत्यक्ष राजनीतिक संतुलन BJP के लिए चुनौती बन सकता है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में लिखा गया कि
“तमिलनाडु चुनावों ने सिर्फ देश को एक स्मार्ट मुख्यमंत्री नहीं दिया, बल्कि स्टालिन जैसा किंगमेकर भी दिया है।”
इसी पोस्ट में दावा किया गया कि “BJP अब कम से कम अगले 10 साल तक तमिलनाडु में मजबूत राजनीतिक जमीन नहीं बना पाएगी।”
हालांकि, BJP नेताओं का कहना है कि पार्टी लगातार दक्षिण भारत में अपना आधार बढ़ा रही है और तमिलनाडु में भी आने वाले वर्षों में बड़ा राजनीतिक विस्तार देखने को मिलेगा। पार्टी नेताओं ने TVK और DMK को लेकर चल रहे सोशल मीडिया नैरेटिव को “काल्पनिक राजनीति” बताया है।
फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय की जीत, स्टालिन की रणनीति और BJP की संभावनाओं को लेकर बहस तेज हो चुकी है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि राज्य की राजनीति में यह नया समीकरण स्थायी रूप लेता है या फिर सिर्फ चुनावी दौर की अस्थायी रणनीति साबित होता है।




