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गोवा में स्मार्ट मीटर को लेकर बवाल: ‘अनिवार्य इंस्टॉलेशन’ के खिलाफ जनता सड़कों पर, कानूनी लड़ाई की चेतावनी

राष्ट्रीय / गोवा | ABC NATIONAL NEWS | पंजिम | 11 मई 2026

गोवा में स्मार्ट बिजली मीटर को अनिवार्य बनाने की सरकारी कोशिश अब बड़े विवाद में बदलती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार और बिजली विभाग की ओर से स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन को “अनिवार्य” बताए जाने के बाद उपभोक्ता संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों ने इसका खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। लोगों का आरोप है कि सरकार उपभोक्ताओं की सहमति के बिना जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश कर रही है, जबकि संसद और बिजली मंत्रालय के हालिया बयानों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं बताया गया।

गोवा के प्रमुख अखबार ओ हेराल्डो की रिपोर्ट के मुताबिक, “Citizens for Democracy” नामक संगठन ने सरकार के दावों को चुनौती देते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर केवल उपभोक्ताओं की सहमति से लगाए जा सकते हैं। संगठन के प्रवक्ता एल्विस गोम्स ने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने 2 अप्रैल 2026 को लोकसभा में स्पष्ट कहा था कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर जबरन नहीं थोपे जा सकते। ऐसे में गोवा सरकार का रुख “कानूनी और लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ” बताया जा रहा है।

विवाद तब और बढ़ गया जब बिजली विभाग के अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन “कम्पल्सरी” यानी अनिवार्य है। इसके बाद कई इलाकों में विरोध तेज हो गया। नागरिक समूहों का कहना है कि सरकार पारदर्शिता के बिना कॉरपोरेट हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता अमर गांवकर ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर परियोजना “आम लोगों पर थोपा गया बड़ा आर्थिक प्रयोग” है। उन्होंने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है और जल्दबाजी में इस योजना को लागू किया जा रहा है। विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली बिल बढ़ने, डेटा निगरानी और तकनीकी गड़बड़ियों जैसी समस्याओं की आशंका है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नागरिक समूह RTI जवाबों, संसद में दिए गए बयानों और बिजली अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देकर कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। उनका दावा है कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना किसी भी मीटर को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।

इस पूरे विवाद के बीच सरकार का तर्क है कि स्मार्ट मीटर बिजली वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने और लाइन लॉस कम करने के लिए जरूरी हैं। Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत कई राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं ताकि बिजली चोरी और तकनीकी नुकसान कम किया जा सके।

हालांकि विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि गोवा पहले से ही कम लाइन लॉस वाले राज्यों में शामिल है और यहां इस तरह की जल्दबाजी की जरूरत नहीं थी। उनका दावा है कि राज्य की AT&C लॉस दर पहले ही राष्ट्रीय मानकों से नीचे है, इसलिए जनता पर जबरन स्मार्ट मीटर थोपने का कोई औचित्य नहीं बनता।

अब यह मामला केवल तकनीकी सुधार का नहीं, बल्कि “उपभोक्ता अधिकार बनाम सरकारी नियंत्रण” की बहस में बदलता जा रहा है। गोवा में बढ़ता विरोध आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप भी ले सकता है, क्योंकि कई सामाजिक संगठनों ने आंदोलन तेज करने और अदालत जाने के संकेत दिए हैं।

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