[the_ad id="179"]
Home » National » शिवेंदु सरकार बनने के बाद इंडो-नेपाल बॉर्डर पर हाई अलर्ट, रोहिंग्या घुसपैठ की आशंका से बढ़ी चौकसी

शिवेंदु सरकार बनने के बाद इंडो-नेपाल बॉर्डर पर हाई अलर्ट, रोहिंग्या घुसपैठ की आशंका से बढ़ी चौकसी

राष्ट्रीय / बिहार-नेपाल सीमा | ABC NATIONAL NEWS | 10 मई 2026

पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता शिवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं। खासतौर पर बिहार के अररिया जिले से सटे जोगबनी बॉर्डर पर नेपाल प्रशासन ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नेपाल में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की पहचान और दस्तावेजों की सख्ती से जांच की जा रही है।

नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल और भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में मौजूद कुछ रोहिंग्या शरणार्थी राजनीतिक बदलाव और संभावित सुरक्षा कार्रवाई के डर से नेपाल की खुली सीमा का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।

शनिवार को नेपाल के मोरंग जिले के प्रमुख जिला अधिकारी युवराज कट्टेल ने संयुक्त सुरक्षा टीम के साथ जोगबनी सीमा नाका का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना वैध पहचान पत्र या आवश्यक दस्तावेजों के किसी भी व्यक्ति को नेपाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

रविवार को सीमा क्षेत्र में सुरक्षा का असर साफ दिखाई दिया। नेपाल जाने वाले लोगों से पहचान पत्र मांगे गए और दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया। नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से सीमा गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

नेपाल प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि सिर्फ अवैध घुसपैठ ही नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध कारोबार और संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सहायक जिला अधिकारी सरोज कोइराला ने कहा कि सीमा क्षेत्र में हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-नेपाल खुली सीमा दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों की पहचान रही है, लेकिन बदलते राजनीतिक और सुरक्षा हालात के कारण समय-समय पर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नेपाल प्रशासन किसी भी संभावित अस्थिरता या अवैध गतिविधि को लेकर जोखिम नहीं लेना चाहता।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शिवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर कई बड़े बदलावों की चर्चा पहले से चल रही है। ऐसे में पड़ोसी देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी क्षेत्रीय हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है और आने वाले दिनों में निगरानी और सख्त होने की संभावना जताई जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *