अंतरराष्ट्रीय / पर्यावरण / व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 10 मई 2026
दुनिया के सबसे बड़े वर्षावन अमेज़न की सुरक्षा को लेकर एक नई उम्मीद सामने आई है। चीन के बड़े मांस आयातकों ने ब्राज़ील से “वनों की कटाई से मुक्त” यानी डिफॉरेस्टेशन-फ्री बीफ़ खरीदने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल होती है, तो यह वैश्विक व्यापार और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।दरअसल चीन दुनिया का सबसे बड़ा बीफ़ और सोया आयातक है। लंबे समय से यह धारणा रही कि चीनी बाजार केवल सस्ते उत्पादों को प्राथमिकता देता है। लेकिन अब चीन के कुछ बड़े आयातक संकेत दे रहे हैं कि वे पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ सप्लाई चेन के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को भी तैयार हैं।
चीन के तियानजिन मीट इंडस्ट्री एसोसिएशन, जो ब्राज़ील से चीन आने वाले लगभग 40 प्रतिशत बीफ़ आयात का प्रतिनिधित्व करता है, ने इस साल के अंत तक 50 हजार मीट्रिक टन प्रमाणित “वनों की कटाई से मुक्त” ब्राज़ीलियाई बीफ़ खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। यह मात्रा चीन को होने वाले ब्राज़ीलियाई बीफ़ निर्यात का लगभग 4.5 प्रतिशत मानी जा रही है।
इस पहल की अगुवाई कर रहीं तियानजिन मीट इंडस्ट्री एसोसिएशन की प्रमुख जिंग यानलिंग हाल ही में अमेज़न क्षेत्र के दौरे पर गई थीं। उन्होंने कहा कि अब चीनी उपभोक्ताओं के बीच सिर्फ “सस्ता सामान” नहीं, बल्कि सुरक्षित, ट्रेस करने योग्य और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की मांग बढ़ रही है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में “ग्रीन बीफ़” का बाजार और मजबूत हो सकता है।
अमेज़न वर्षावन लंबे समय से वनों की कटाई की समस्या से जूझ रहा है। पर्यावरण संगठनों के अनुसार, जंगल साफ किए जाने के बाद लगभग 90 प्रतिशत जमीन मवेशियों के चरागाह में बदल दी जाती है। यही वजह है कि ब्राज़ीलियाई बीफ़ उद्योग को अमेज़न विनाश से जोड़कर देखा जाता है।
नई योजना के तहत बीफ़ पर “Beef on Track” नाम का विशेष प्रमाणन लेबल लगाया जाएगा। यह प्रमाणन ब्राज़ील की गैर-लाभकारी संस्था इमाफ्लोरा विकसित कर रही है। इस लेबल के जरिए उपभोक्ता QR कोड स्कैन करके यह जान सकेंगे कि मांस किस फार्म से आया है और उसका उत्पादन वनों की कटाई से जुड़ा है या नहीं।
चीन के आयातक ऐसे बीफ़ के लिए करीब 10 प्रतिशत अधिक कीमत देने को तैयार बताए जा रहे हैं। हालांकि इस योजना के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। ब्राज़ील की मौजूदा ट्रेसबिलिटी व्यवस्था पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अभियोजकों का कहना है कि कई बार गलत तरीके से पशुओं को एक फार्म से दूसरे फार्म में दिखाकर अवैध वनों की कटाई को छिपाया जाता है, जिसे “कैटल लॉन्ड्रिंग” कहा जाता है।
ब्राज़ील के बीफ़ उद्योग संगठन ABIEC ने भी नई प्रमाणन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अतिरिक्त प्रमाणन और नए नियम व्यापार के लिए बाधा बन सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब चीन पहले ही अपने घरेलू उद्योग की रक्षा के लिए आयात कोटा लागू कर चुका है।
इसके बावजूद पर्यावरण विशेषज्ञ इस पहल को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर चीन जैसा विशाल बाजार टिकाऊ उत्पादों को प्राथमिकता देना शुरू करता है, तो इसका असर पूरी वैश्विक कृषि और पशुपालन व्यवस्था पर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ व्यापारिक बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक उपभोक्ता मानसिकता में आ रहे परिवर्तन का संकेत है। अब पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या कार्यकर्ताओं का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि बाजार और उपभोक्ता भी धीरे-धीरे इसमें बड़ी भूमिका निभाने लगे हैं।




