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24 घंटे में दूसरा बड़ा झटका: कोहिनूर मजूमदार के बाद TMC प्रवक्ता रिजु दत्ता 6 साल के लिए निलंबित

राष्ट्रीय / पश्चिम बंगाल | अरिंदम बनर्जी | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता 10 मई 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी ने अनुशासनहीनता और कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्रवक्ता Riju Dutta को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पार्टी पहले ही चुनावी हार और संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। खास बात यह है कि पिछले 24 घंटे में यह TMC की दूसरी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई मानी जा रही है। इससे पहले पार्टी नेता कोहिनूर मजूमदार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

रिजु दत्ता ने निलंबन के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि उन्हें “सच बोलने की सजा” दी गई है। उन्होंने कहा कि पिछले 13 वर्षों से उन्होंने पार्टी के लिए लगातार काम किया और अपनी मेहनत के दम पर संगठन में पहचान बनाई, लेकिन अब उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। दत्ता ने आरोप लगाया कि पार्टी की अनुशासन समिति ने उनका जवाब पढ़े बिना ही कार्रवाई का फैसला कर लिया।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि पार्टी नोटिस में कहा गया था कि वह अनुशासन समिति के सामने पेश नहीं हुए, जबकि उन्होंने तय समय के भीतर 9 मई की सुबह तृणमूल भवन में अपना जवाब जमा कर दिया था। रिजु दत्ता ने तंज भरे अंदाज में लिखा कि शायद उनका जवाब पढ़ने से पहले ही निलंबन का पत्र तैयार कर लिया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “मैं वापस आऊंगा।”

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रिजु दत्ता के खिलाफ यह कार्रवाई केवल अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि चुनाव बाद बदले राजनीतिक माहौल का परिणाम है। हाल ही में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर Suvendu Adhikari को लेकर टिप्पणी की थी। इसके अलावा उन्होंने चुनाव बाद हिंसा रोकने को लेकर बीजेपी के कदमों की सार्वजनिक तौर पर तारीफ भी की थी, जिसे पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया।

रिजु दत्ता इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। बंगाल चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के चर्चित IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को ऑन कैमरा धमकी देने का मामला भी काफी सुर्खियों में आया था। हालांकि उस समय पार्टी ने उनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की थी, लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात में उनके बयानों को पार्टी लाइन से अलग माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और नेतृत्व को लेकर सवाल तेज हो सकते हैं। पार्टी अब अपने संगठन को सख्ती से नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है ताकि टूट और बगावत को रोका जा सके। लेकिन लगातार हो रही अनुशासनात्मक कार्रवाइयों से यह संकेत भी मिल रहा है कि अंदरखाने सब कुछ सामान्य नहीं है।

वहीं विपक्षी दलों ने TMC की इस कार्रवाई को लेकर निशाना साधना शुरू कर दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अब अंदरूनी लोकतंत्र खो चुकी है और जो नेता अलग राय रखता है, उसके खिलाफ कार्रवाई कर दी जाती है। आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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