अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/ तेहरान | 5 मई 2026
मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है, जहां Strait of Hormuz में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक जहाज़ों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक पोतों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे पहले से लागू नाजुक युद्धविराम पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे युद्धविराम के बाद की सबसे गंभीर उकसावे वाली कार्रवाई माना जा रहा है। अमेरिका पहले ही इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा चुका है और उसने अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अभियान शुरू किया है। इसके जवाब में ईरान ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि उसकी अनुमति के बिना किसी भी विदेशी सैन्य ताकत की मौजूदगी को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानेगा और उसे निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
इस टकराव की पृष्ठभूमि में अमेरिका का वह ऑपरेशन है जिसके तहत वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में फंसे जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता देने और इस रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है। हालांकि ईरान इसे अपनी क्षेत्रीय पकड़ को चुनौती देने के रूप में देख रहा है और इसी कारण उसने आक्रामक सैन्य रुख अपनाया है। हालात यह हो गए हैं कि कई अंतरराष्ट्रीय जहाज़ इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, समुद्री व्यापार लगभग ठप पड़ गया है और तेल की सप्लाई बाधित होने लगी है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाया और उसे नुकसान पहुंचाया, लेकिन अमेरिका ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके सभी जहाज़ सुरक्षित हैं और किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह केवल सीमित झड़प तक नहीं रहेगा बल्कि एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसका असर न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।



