राष्ट्रीय | अरिंदम बनर्जी | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 मई 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी माहौल और गरम हो गया है। इस बार विवाद वोटिंग को लेकर नहीं, बल्कि मतगणना को लेकर खड़ा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें मतगणना के दौरान काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को तैनात करने की बात कही गई है। पार्टी ने इसे लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और तुरंत सुनवाई की मांग की है, क्योंकि चुनाव परिणाम आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की तरफ से 30 अप्रैल को एक आदेश जारी किया गया। इस आदेश में कहा गया कि मतगणना के दौरान हर टेबल पर कम से कम एक सुपरवाइजर या सहायक के तौर पर केंद्र सरकार का कर्मचारी मौजूद रहेगा। इस फैसले पर तृणमूल कांग्रेस ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। पार्टी का मानना है कि केंद्रीय कर्मचारी केंद्र सरकार के प्रभाव में आ सकते हैं, जिससे नतीजों पर असर पड़ने की आशंका है।
तृणमूल कांग्रेस ने पहले इस फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से उसे राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह अपनी जरूरत के हिसाब से राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात कर सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि मतगणना प्रक्रिया में कई स्तर की निगरानी रहती है। वहां माइक्रो ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट और अन्य अधिकारी मौजूद रहते हैं, इसलिए किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना बहुत कम है। अदालत के इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस ने अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।
तृणमूल की ओर से पेश हुए वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि यह आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी किया गया है और यह सिर्फ आशंकाओं पर आधारित है। उनका कहना है कि अगर पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय कर्मचारियों की भूमिका बढ़ाई जाती है, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जल्द सुनवाई की मांग की है, ताकि मतगणना से पहले स्थिति साफ हो सके।
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार चल रही है और इसमें किसी तरह का पक्षपात नहीं है। अधिकारियों ने अदालत में बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती का मकसद पारदर्शिता बनाए रखना और विवाद की गुंजाइश को कम करना है। उनका कहना है कि मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
इस बीच राज्य में माहौल पहले से ही तनावपूर्ण बना हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और खुद जाकर वहां स्थिति का जायजा लिया था। प्रशासन का कहना है कि सभी स्ट्रॉन्ग रूम पर 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी हो रही है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कोलकाता समेत कई जगहों पर मतगणना केंद्रों के आसपास धारा 144 भी लागू की गई है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हो चुका है और अब 4 मई को नतीजे आने हैं। ऐसे में मतगणना से ठीक पहले उठे इस विवाद ने चुनावी माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर है कि वह इस मामले में क्या फैसला देता है और क्या मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव होता है या नहीं।




