राष्ट्रीय | सुरजीत सिंह | ABC NATIONAL NEWS | चंडीगढ़ | 1 मई 2026
पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को अहम घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में अपनी सरकार का विश्वास प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव ऐसे समय में लाया गया, जब राज्य की सियासत में लगातार बयानबाजी और टकराव का माहौल बना हुआ है। सदन की कार्यवाही के दौरान सबसे बड़ी बात यह रही कि कांग्रेस और बीजेपी के विधायक मौजूद नहीं थे। दोनों पार्टियों ने इस प्रक्रिया से दूरी बनाकर साफ संकेत दिया कि वे सरकार के इस कदम का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं। विपक्ष की गैरमौजूदगी के बीच आम आदमी पार्टी ने सदन में अपनी स्थिति मजबूत दिखाने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि उनकी सरकार जनता के भरोसे पर खरी उतरी है और राज्य के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार स्थिर है और किसी तरह का कोई संकट नहीं है।
विपक्ष की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की चर्चा चल रही है। कुछ लोग इसे सरकार के खिलाफ विरोध का तरीका मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं। हालांकि, सदन में मौजूद आप विधायकों ने एकजुट होकर सरकार के समर्थन का प्रदर्शन किया।
विश्वास प्रस्ताव को आमतौर पर सरकार अपनी बहुमत की स्थिति साफ करने के लिए लाती है। इस कदम से यह संदेश देने की कोशिश भी की जाती है कि सरकार पूरी तरह से नियंत्रण में है और उसके पास पर्याप्त समर्थन है।
पंजाब की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और बहस को जन्म दे सकता है। एक तरफ सरकार अपनी मजबूती दिखाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष अलग राह अपनाकर राजनीतिक संदेश देने में जुटा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।




