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“खाली कुर्सी से कोर्ट को मूर्ख मत बनाओ” — वडोदरा कलेक्टर पर गुजरात हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

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राज्य | विशेष संवाददाता | ABC NATIONAL NEWS | अहमदाबाद/वडोदरा | 1 मई 2026

गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा के कलेक्टर अनिल धामेलिया को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। एक जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जब कलेक्टर कोर्ट में वर्चुअल रूप से मौजूद नहीं थे, तो जजों ने इसे गंभीरता से लिया और सख्त शब्दों में फटकार लगाई। कोर्ट में कलेक्टर की खाली कुर्सी देखकर जस्टिस भार्गव डी. करिया और जस्टिस एन.वी. पीरजादा की बेंच ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर कलेक्टर कहां हैं और आदेशों का पालन क्यों नहीं हो रहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जजों की नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने तुरंत कलेक्टर को पेश होने का निर्देश दिया। इसके बाद कलेक्टर अनिल धामेलिया को जल्दबाजी में अपने मोबाइल फोन के जरिए कोर्ट में जुड़ना पड़ा। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए इसे आदेशों की अनदेखी और न्याय प्रक्रिया के प्रति लापरवाही बताया।

यह पूरा मामला वडोदरा जिले के डभोई इलाके के बारीपुरा गांव की जमीन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता काफी समय से इस जमीन को गैर-कृषि उपयोग में बदलने की प्रक्रिया पूरी करना चाहता था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर देरी हो रही थी। इस वजह से मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने पहले भी इस संबंध में आदेश दिए थे, लेकिन उन पर सही तरीके से अमल नहीं हुआ। सुनवाई में यह भी सामने आया कि मौजूदा कलेक्टर अनिल धामेलिया और पूर्व कलेक्टर ए.बी. शाह दोनों ने कोर्ट के आदेशों को समय पर लागू नहीं किया।

कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार के राजस्व सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। इस आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और अधिकारियों पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है।

बताया जा रहा है कि अगर जांच में लापरवाही साबित होती है, तो कलेक्टर समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कोर्ट के आदेशों को लागू करने में देरी क्यों होती है और जिम्मेदारी तय करने में इतनी देर क्यों लगती है।

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